1.20 लाख आबादी वाले शहर में प्रमुख बाजारों और चौराहों पर सार्वजनिक शौचालयों का अभाव
महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी
गंगावती (कोप्पल)। धान और हनुमान की नगरी के रूप में प्रसिद्ध गंगावती शहर तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन सार्वजनिक सुविधाओं के मामले में पिछड़ता नजर आ रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों और भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्रों में पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से नागरिकों और बाहर से आने वाले लोगों को खुले में लघुशंका व शौच के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
करीब 1.20 लाख आबादी वाले गंगावती में प्रतिदिन करीब 20 हजार लोग विभिन्न कामों और खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। गांधी चौक, महावीर चौक, सीबीएस चौक और जुलाईनगर जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों का अभाव है। केंद्रीय बस अड्डे और आंबेडकर चौक को छोडक़र अधिकांश प्रमुख स्थानों पर ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
व्यापारी रामू ने बताया कि गांधी चौक में रोजाना बाजार आने वाले लोग खाली जगहों में लघुशंका करते हैं। व्यापारी रोकते हैं तो उनसे ही विवाद करने लगते हैं।
महावीर चौक, चंद्रहास सिनेमा रोड, दुर्गम्मा हॉल के पास पार्किंग क्षेत्र, ओएसबी रोड और बंबू बाजार की ओर जाने वाले लोहे के पुल के आसपास भी खुले में लघुशंका के कारण दुर्गंध फैल रही है।
शहरवासी आनंद ने कहा कि पुरुष तो किसी तरह खुले में चले जाते हैं, लेकिन महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है। खाली भूखंडों और झाडिय़ों में जाना उनकी मजबूरी बन गई है।
खेल मैदान भी नहीं बचा
तालुक खेल मैदान में स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे कार्यक्रमों के दौरान भी पर्याप्त शौचालय सुविधा नहीं रहती। दूर स्थित शौचालय के कारण लोग मैदान और आसपास खुले में लघुशंका करते हैं, जिससे दुर्गंध फैलती है।
यात्री डाक्या नायक ने कहा कि पत्नी के साथ श्रावण के लिए कपड़े खरीदने गंगावती आया था। सार्वजनिक शौचालय नहीं मिला, इसलिए मजबूरी में खुले स्थान का सहारा लेना पड़ा।
नागरिकों का कहना है कि खुले में शौच और लघुशंका से स्वच्छता प्रभावित होने के साथ बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। शहर की बढ़ती आबादी और बाहरी क्षेत्रों से आने वाले हजारों लोगों को देखते हुए प्रमुख चौराहों पर तत्काल स्वच्छ और सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध कराने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का नहीं मिल रहा सहयोग
गांधी, महावीर, जुलाईनगर और न्यायालय के सामने सहित कई स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाने में नगर निकाय रुचि ले रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का सहयोग नहीं मिल रहा। वे दुर्गंध की शिकायत कर विरोध करते हैं।
–आर. विरूपाक्षमूर्ति, नगर निकाय आयुक्त
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