बारिश में दुधसागर जलप्रपात की भव्यता और पश्चिमी घाट की हरियाली बनाती है सफर को यादगार
दांडेेली (उत्तर कन्नड़)। मानसून के आगमन के साथ पश्चिमी घाटों की प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर पहुंच जाती है। हरी-भरी पहाडिय़ां, घने जंगल, धुंध की चादर, कल-कल करती जलधाराएं और झरनों के बीच रेल यात्रा पर्यटकों को अनूठा अनुभव देती है। जोयडा तालुक के कैसल रॉक रेलवे स्टेशन से गोवा की ओर जाने वाला रेल मार्ग मानसून में प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बन जाता है।
दुधसागर जलप्रपात सबसे बड़ा आकर्षण
कैसल रॉक से ट्रेन रवाना होने के बाद पटरियां पश्चिमी घाट के घने जंगलों, पहाड़ों और घाटियों के बीच से गुजरती हैं। बारिश के मौसम में पूरा क्षेत्र हरी चादर से ढक जाता है। खिडक़ी से दिखाई देने वाले मनोरम दृश्य यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
इस सफर का प्रमुख आकर्षण दुधसागर जलप्रपात है। मानसून में जलप्रपात का प्रवाह तेज हो जाने से इसकी भव्यता कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ से दूध की सफेद धारा जैसी गिरती जलराशि, काली चट्टानों और चारों ओर फैली हरियाली के बीच बेहद मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती है।
बारिश, धुंध और हरियाली का संगम
मार्ग में कई सुरंगें, पुल, घुमावदार पहाड़ी मोड़ और घने जंगल आते हैं। एक ओर बारिश की फुहारें, दूसरी ओर पहाडिय़ों के बीच तैरती धुंध और बीच-बीच में दिखाई देने वाली छोटी-बड़ी जलधाराएं यात्रा को रोमांचक बना देती हैं। ट्रेन के पहियों की लयबद्ध आवाज और खिडक़ी पर पड़ती बारिश की बूंदें इस अनुभव को और खास बना देती हैं।
मानसून में कैसल रॉक-गोवा रेल मार्ग पर सफर सामान्य रेल यात्रा से बढक़र प्रकृति के करीब पहुंचने का अवसर बन जाता है। पश्चिमी घाट की हरियाली, दुधसागर की भव्यता और बारिश की ठंडी फुहारों के बीच यह यात्रा प्रकृति प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव साबित होती है।
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