मंगलापुरम’ नहीं, अब फिर अपना मेंगलूरु स्टेशन!मेंगलूरु सेंट्रल रेलवे स्टेशन।

पालक्काड रेल मंडल से मेंगलूरु के अलग होने पर कन्नड़ भाषियों में खुशी

मैसूरु मंडल में शामिल होने से विकास की उम्मीद

मेंगलूरु। लंबे समय तक केरल के पालक्काड रेल मंडल के अधीन रहे मेंगलूरु रेलवे क्षेत्र को अब मैसूरु रेल मंडल में शामिल किए जाने से कर्नाटक के लोगों में खुशी है। कासरगोड जिले में रहने वाले कन्नड़ भाषी भी केंद्र सरकार के इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। इसे कन्नड़ भाषियों के गौरव और मेंगलूरु के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मेंगलूरु रेलवे स्टेशन पर लंबे समय तक मलयालम भाषा का प्रभाव रहने के कारण इसे केरल में ‘मंगलापुरम’ कहे जाने की स्थिति थी। स्थानीय लोगों का आरोप रहा है कि स्टेशन पर कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक मलयाली कर्मचारियों का प्रभाव अधिक था। ऐसे में कन्नड़ भाषा में सूचनाएं और उद्घोषणाएं अपेक्षाकृत कम सुनाई देती थीं। अब मंडल परिवर्तन के बाद स्थिति बदलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आर्थिक हितों तक सीमित रहा ध्यान?

आलोचकों का कहना है कि जब मेंगलूरु पालक्काड मंडल के अधीन था, तब इसके विकास पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। लेकिन इसे मैसूरु मंडल में शामिल किए जाने के बाद केरल में विरोध और आंदोलन होना इस बात का संकेत है कि मामला केवल विकास का नहीं, बल्कि आर्थिक हितों से भी जुड़ा था।

पालक्काड मंडल के अधीन रहते हुए मेंगलूरु के यात्रियों की कई शिकायतों को अपेक्षित महत्व नहीं मिलने के आरोप भी लगते रहे हैं। रेलगाडिय़ों का समय, ठहराव, आरक्षण और अन्य व्यवस्थाएं दक्षिण केरल के यात्रियों की सुविधा के अनुरूप तय किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। यहां तक कि मेंगलूरु स्टेशन पर लगाए गए कन्नड़ बोर्ड हटाए जाने की स्थिति भी बनी थी।

कासरगोड के स्टेशनों की उपेक्षा का आरोप

कासरगोड, कुंबले, उप्पल और मंजेश्वर जैसे स्टेशनों के विकास की उपेक्षा किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। कुंबले और मंजेश्वर में पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद विकास की योजनाएं तैयार कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने में केरल सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं होने की बात कही गई है।

मेंगलूरु को पालक्काड मंडल से अलग करने की मांग लंबे समय से उठती रही है। जॉर्ज फर्नांडिस और डी.वी. सदानंद गौड़ा के रेल मंत्री रहने के दौरान भी इस दिशा में प्रयास हुए, लेकिन केरल के मजबूत रेल लॉबी के कारण सफलता नहीं मिली। हाल में भी केरल में यूडीएफ और एलडीएफ की ओर से विरोध देखने को मिला। ओणम के अवसर पर पालक्काड मंडल कार्यालय के सामने विरोध स्वरूप अनशन भी किया गया था।

चौटा और सोमण्णा के प्रयास का दावा

मेंगलूरु के सांसद कैप्टन ब्रिजेश चौटा और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमण्णा के प्रयासों से मेंगलूरु रेलवे क्षेत्र को पालक्काड मंडल से अलग कर मैसूरु मंडल में शामिल किया गया है। इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए समर्थकों का कहना है कि इससे मेंगलूरु क्षेत्र को केरल के प्रभाव से बाहर निकलकर अपनी जरूरतों के अनुरूप रेलवे विकास का अवसर मिलेगा।

इस बदलाव के बाद कासरगोड जिले के मंजेश्वर और कुंबले स्टेशन पालक्काड मंडल के अंतिम स्टेशनों में शामिल होंगे। इससे इन स्टेशनों के विकास पर भी अधिक ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।

पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नरेश मुल्लेरिया ने कहा कि मेंगलूरु क्षेत्र को पालक्काड मंडल से मैसूरु मंडल में स्थानांतरित करना सकारात्मक कदम है। इससे भविष्य में क्षेत्र के रेलवे विकास को नई गति मिलने की संभावना है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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