एकल फसलों की खेती से बढ़ रही अस्थिरता : चन्नप्पा अंगडीकर्नाटक विद्यावर्धक संघ के कृषि एवं पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित ‘टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण’ विषयक व्याख्यान करते सहायक कृषि निदेशक एवं साहित्यकार डॉ. चन्नप्पा अंगडी।

पारंपरिक कृषि और स्थानीय खाद्य संस्कृति अपनाने पर जोर

धारवाड़। सहायक कृषि निदेशक एवं साहित्यकार डॉ. चन्नप्पा अंगडी ने कहा कि पारंपरिक कृषि पद्धतियों को छोडक़र व्यावसायिक एकल फसलों की ओर बढऩा टिकाऊ कृषि के लिए बड़ी चुनौती है। व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर स्थिरता के मूल्यों को अपनाकर ही टिकाऊ कृषि को मजबूत किया जा सकता है।

वे कर्नाटक विद्यावर्धक संघ के कृषि एवं पर्यावरण मंच की ओर से आयोजित ‘टिकाऊ कृषि और पर्यावरण संरक्षण’ विषयक व्याख्यान में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि महाकवि पंप के काव्य में कृषि पर निर्भर समाज और कृषि के महत्व का उल्लेख मिलता है। उस समय धान, ज्वार आदि अनाजों की अनेक किस्में प्रचलित थीं। लेकिन आज पारंपरिक कृषि छोडक़र गन्ना, कपास, सुपारी, सोयाबीन और मक्का जैसी व्यावसायिक एकल फसलों पर निर्भरता बढ़ रही है। अधिक आय के पीछे भागने वाली यह जोखिमपूर्ण व्यवस्था कृषि की स्थिरता के लिए खतरा है।

डॉ. अंगडी ने कहा कि स्थानीय स्तर पर उगने वाले पारंपरिक फल, सब्जियां और अनाज पोषण की दृष्टि से अधिक उपयोगी हैं। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले रासायनिक रूप से संरक्षित खाद्य पदार्थों के प्रति बढ़ता आकर्षण स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का विषय है। ज्वार, मोटे अनाज, पशुधन और संयुक्त परिवार जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएं टिकाऊ जीवन और कृषि की पहचान थीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर पर्यावरणविद् एवं इको विलेज के संस्थापक पी.वी. हिरेमठ ने कहा कि पर्यावरण विनाश से प्राकृतिक आपदाएं और तापमान वृद्धि जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। कृषि की सफलता के लिए कीट, पक्षी और वन्यजीवों का संरक्षण भी जरूरी है। इसलिए सभी को पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना चाहिए।

इस अवसर पर उद्यमी शशिभूषण दोडवाड, डॉ. संजीव कुलकर्णी, गुरु हिरेमठ, जयश्री गवली, सिद्धू कंबार सहित अनेक लोग मौजूद थे।

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

 

 

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *