कर्नाटक में तीन साल में 39 हजार से अधिक महिलाएं लापताकर्नाटक में तीन साल में 39 हजार से अधिक महिलाएं लापता

3,510 का अब तक सुराग नहीं

प्रेम प्रसंग से लेकर सोशल मीडिया, साइबर ठगी और मानव तस्करी तक कई आशंकाएं

हुब्बल्ली। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार के दावों के बीच कर्नाटक में महिलाओं और बालिकाओं के लापता होने के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। गृह विभाग की जानकारी के अनुसार पिछले तीन वर्षों में राज्य में 39,481 महिलाएं एवं बालिकाएं लापता हुईं। इनमें से 3,510 का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। लापता होने वालों में नाबालिग बालिकाएं भी शामिल हैं।

महिलाओं के लगातार लापता होने से इनके पीछे प्रेम प्रसंग, पारिवारिक दबाव, सोशल मीडिया का प्रभाव और साइबर अपराध के साथ-साथ मानव तस्करी जैसे संगठित नेटवर्क की आशंका भी उठ रही है। हालांकि हर मामले का कारण एक जैसा नहीं है और पुलिस जांच के बाद ही वास्तविक वजह सामने आती है।

पढ़ाई का दबाव भी बन रहा कारण

परीक्षा परिणाम, पढ़ाई का दबाव, माता-पिता की सख्ती या डांट के डर से कुछ छात्राएं अचानक घर छोड़ देती हैं। वहीं कई युवतियां प्रेम संबंधों में परिवार या सामाजिक विरोध के कारण अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ चली जाती हैं।

सोशल मीडिया और डेटिंग प्लेटफॉर्म के अत्यधिक इस्तेमाल से अनजान लोगों से संपर्क बढऩा भी जोखिम पैदा कर रहा है। साइबर ठगी के अलावा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को नौकरी, मॉडलिंग या बेहतर जीवनशैली का लालच देकर अपने जाल में फंसाने की आशंका भी सामने आती है।

पुलिस की निगरानी से लेकर लुकआउट नोटिस तक

लापता या अपहरण की शिकायत मिलते ही पुलिस स्तर पर तलाश शुरू की जाती है। सुराग नहीं मिलने पर परिजनों की सहमति से समाचार पत्र, दूरदर्शन और आकाशवाणी जैसे माध्यमों में जानकारी प्रसारित की जाती है। राज्य की सीमाओं, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर पोस्टर व फोटो लगाए जाते हैं।

पुलिस आसपास के जिलों में दर्ज मामलों और अज्ञात शवों से संबंधित यूडीआर मामलों की भी जांच करती है। जरूरत पडऩे पर लुकआउट नोटिस जारी कर अधिकारियों की विशेष टीमें गठित कर तलाश अभियान चलाया जाता है।

मानव तस्करी पर भी नजर

मानव तस्करी की आशंका होने पर घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाते हैं। उपलब्ध हुलिए और अन्य जानकारियों के आधार पर संबंधित पुलिस इकाइयों से समन्वय किया जाता है। राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो से भी आवश्यक जानकारी जुटाई जाती है।

तस्करी के मामलों में आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है। जांच अधिकारियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया भी तैयार कर राज्य के विभिन्न पुलिस इकाइयों को भेजी गई है।

नाबालिग बालिकाएं भी बड़ी चिंता

2024 में 2,500, 2025 में 2,645 और 2026 में 1,731 नाबालिग लापता होने की जानकारी दी गई है। इनमें क्रमश: 2,433, 2,505 और 900 को तलाश लिया गया, जबकि 67, 140 और 831 का सुराग बाकी बताया गया है।

18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में 2024 में 14,413, 2025 में 15,159 और 2026 में 9,909 लापता हुईं। इनमें क्रमश: 14,096, 14,763 और 8,150 की तलाश हुई, जबकि 317, 396 और 1,759 महिलाएं अभी भी लापता बताई गई हैं।

तीन साल का आंकड़ा

वर्ष — नाबालिग लापता — नाबालिग बरामद – नाबालिगों का सुराग बाकी
2024 — 2,500 — 2,433 — 67
2025 — 2,645 — 2,505 — 140
2026 — 1,731 — 900 — 831

वर्ष — 18+ महिलाएं लापता — बरामद — सुराग बाकी
2024 — 14,413 — 14,096 — 317
2025 — 15,159 — 14,763 — 396
2026 — 9,909 — 8,150 — 1,759

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By Bharat Ki Awaz

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