शराब से कर्नाटक के खजाने में 1.10 लाख करोड़ रुपएशराब से कर्नाटक के खजाने में 1.10 लाख करोड़ रुपए

तीन साल में आबकारी राजस्व 16 प्रतिशत उछला

पिछले साल 12.3 प्रतिशत की छलांग

इस साल 45 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य

बिक्री विस्तार के लिए 900 नए लाइसेंस मंजूर

हुब्बल्ली। कर्नाटक में शराब की बिक्री सरकारी खजाने की कमाई का बड़ा जरिया बन गई है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में राज्य के आबकारी विभाग ने 1,10,595.50 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाया। वर्ष 2023-24 के मुकाबले 2025-26 में कमाई करीब 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पिछले वित्त वर्ष में ही राजस्व में 4,399 करोड़ रुपए का उछाल आया। कमाई की रफ्तार बनाए रखने के लिए सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 45 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, शराब बिक्री का दायरा बढ़ाने के लिए एमएसआईएल को 900 अतिरिक्त लाइसेंस देने की मंजूरी दी गई है।

एक साल में 12.3 प्रतिशत बढ़ी कमाई

आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में शराब से 34,628.98 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। 2024-25 में यह बढक़र 35,783.54 करोड़ रुपए और 2025-26 में 40,182.98 करोड़ रुपए पहुंच गया। इस तरह पिछले तीन वर्षों में राजस्व लगातार बढ़ा। वर्ष 2024-25 में वृद्धि 3.3 प्रतिशत थी, जो 2025-26 में बढक़र 12.3 प्रतिशत हो गई। सरकार का नया लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष के वास्तविक संग्रह से करीब 12 प्रतिशत अधिक है।

900 अतिरिक्त लाइसेंस से बिक्री का विस्तार

राजस्व बढ़ाने की रणनीति के तहत सरकार ने एमएसआईएल को अतिरिक्त 900 सीएल (11-सी) लाइसेंस देने की मंजूरी दी है। इनमें 220 विधानसभा क्षेत्रों के लिए चार-चार, यानी 880 लाइसेंस और यादगीर जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए पांच-पांच, यानी 20 लाइसेंस शामिल हैं।

इसके अलावा, प्रत्येक तालुक में कम से कम दो लाइसेंस के हिसाब से 352 और जिला मुख्यालयों में दो-दो लाइसेंस के हिसाब से 58 लाइसेंस निर्धारित किए गए हैं। क्षेत्रीय मांग के अध्ययन के आधार पर अन्य स्थानों पर भी लाइसेंस दिए जा सकेंगे।

नियमों के तहत मिलेगी अनुमति

नए लाइसेंस कर्नाटक आबकारी (भारतीय और विदेशी शराब की बिक्री) नियम, 1968 तथा कर्नाटक आबकारी (लाइसेंस की सामान्य शर्तें) नियम, 1967 के तहत जारी किए जाएंगे। निर्धारित शुल्क और अन्य शर्तें पूरी करना अनिवार्य होगा।

शराब की ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की मांग भी उठती रही है, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक इसे मंजूरी नहीं दी है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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