सात दौर की काउंसलिंग के बाद भी 191 एमबीबीएस सीटें खाली!कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण कार्यालय।

महंगी फीस से प्रबंधन कोटे में प्रवेश का संकट

कटऑफ घटाने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से गुहार

हुब्बल्ली। कर्नाटक में चिकित्सा शिक्षा की बढ़ती लागत और प्रवेश की पात्रता के बीच का अंतर उजागर हुआ है। सात दौर की काउंसलिंग के बावजूद राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों में 191 एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं। पिछले पांच वर्षों में पहली बार इतनी लंबी प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी सीटें रिक्त हैं। इन्हें भरने के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से पात्रता कटऑफ अंक घटाने की मांग की है।

रविवार को दूसरे रिक्त सीट आवंटन दौर के बाद 273 सीटें खाली थीं। सोमवार को कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केईए) ने दो दौर में 84 सीटें आवंटित कीं, लेकिन इसके बाद भी 191 सीटें नहीं भर पाईं। चिकित्सा शिक्षा निदेशक सुजाता राठौड़ के अनुसार, कटऑफ में छूट के लिए एनएमसी को पत्र भेजा गया है। अतिरिक्त काउंसलिंग की अनुमति मिलने पर केईए इसके लिए तैयार है। इसके विपरीत, दंत चिकित्सा की सभी बीडीएस सीटें भर गई हैं।

80 लाख रुपए तक पहुंच रहा पढ़ाई का खर्च

खाली सीटों में बड़ी संख्या प्रबंधन कोटे की बताई जा रही है। निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई और छात्रावास सहित खर्च करीब 80 लाख रुपए तक पहुंचने से कई परिवारों के लिए प्रवेश आर्थिक रूप से कठिन हो रहा है।

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति भगवान बी.सी. के अनुसार, सरकारी कोटे में सीट नहीं पाने वाले विद्यार्थियों के लिए प्रबंधन कोटे की भारी फीस चुकाना आसान नहीं है। विश्वविद्यालय निजी महाविद्यालयों की फीस सीधे नियंत्रित नहीं करता, लेकिन इसमें कमी की सिफारिश कर सकता है।

सीटें बढ़ीं, चिकित्सा शिक्षा को आर्थिक रूप से सुलभ बनाना चुनौती

राज्य में फिलहाल 15,395 एमबीबीएस सीटें हैं। नए चिकित्सा महाविद्यालय खुलने से इनकी संख्या और बढऩे की संभावना है। ऐसे में सवाल केवल सीटें बढ़ाने का नहीं, बल्कि योग्य विद्यार्थियों के लिए चिकित्सा शिक्षा को आर्थिक रूप से सुलभ बनाने का भी है।

अब निगाहें एनएमसी के फैसले पर हैं। कटऑफ में छूट और अतिरिक्त काउंसलिंग की अनुमति से रिक्त सीटें भरने का अवसर मिल सकता है, लेकिन फीस का बोझ बना रहा तो प्रवेश की आर्थिक बाधा दूर करना भी जरूरी होगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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