पिलिकुला की 339.90 एकड़ जमीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हस्तांतरितपिलिकुला निसर्गधाम।

30 साल की लीज समाप्त, जमीन के स्वामित्व की अड़चन दूर होने से विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति

निजी भागीदारी और उपलीज का रास्ता साफ

मेंगलूरु। पिलिकुला निसर्गधाम के विकास में वर्षों से बाधा बनी जमीन के स्वामित्व की समस्या अब दूर हो गई है। राज्य सरकार ने मेंगलूरु तालुक के मूडुशेड्डे और तिरुवैलु गांवों में स्थित कुल 339.90 एकड़ जमीन इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हस्तांतरित करने का सरकारी आदेश जारी किया है। इसके साथ ही निसर्गधाम को दी गई 30 साल की लीज समाप्त कर दी गई है।

18 सितंबर को मेंगलूरु में हुई मंत्रिमंडल बैठक में 356.20 एकड़ जमीन की लीज समाप्त कर 339.90 एकड़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को देने का निर्णय लिया गया था। अब इस पर औपचारिक आदेश जारी होने के साथ राजस्व अभिलेखों में भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं।

2036 तक थी लीज की अवधि

सरकार ने वर्ष 2002 में मूडुशेड्डे गांव की 15 एकड़ और वर्ष 2006 में मूडुशेड्डे तथा तिरुवैलु गांवों की 341.46 एकड़ जमीन सहित कुल लगभग 356.46 एकड़ भूमि 30 साल की लीज पर दी थी। इसके लिए प्रति एकड़ 100 रुपए वार्षिक शुल्क तय किया गया था। लीज वर्ष 2036 तक प्रभावी थी। जमीन का पूर्ण हस्तांतरण कराने के लिए बड़ी राशि चुकानी पड़ती, इसलिए मंत्रिमंडल ने इसे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नि:शुल्क आवंटित करने का निर्णय लिया।

24.43 एकड़ जमीन आवंटन से बाहर

कुल जमीन में से 339.90 एकड़ विभाग को हस्तांतरित की गई है। शेष 24.43 एकड़ में सार्वजनिक सडक़ें, पहले से अधिकार पत्र (पट्टा) जारी की गई जमीन और न्यू मेंगलूरु पोर्ट प्राधिकरण की ओर से आवंटित भूमि शामिल है।

निजी भागीदारी से विकास का रास्ता खुलेगा

अब तक जमीन राजस्व विभाग के अधीन होने से विकास प्राधिकरण को कई परियोजनाएं शुरू करने में कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ता था। नए हस्तांतरण के बाद अन्य विभागों के सहयोग, निजी भागीदारी और उपलीज के माध्यम से विकास कार्य शुरू करना आसान होगा। प्राधिकरण को हर साल करीब 35,600 रुपए लीज शुल्क देना पड़ता था। भवनों पर लगभग 30 लाख रुपए का कर बकाया भी पिछले वर्ष ग्राम पंचायत को चुकाया गया था।

विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी

जमीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हस्तांतरित होने से अब लीज शुल्क देने की जरूरत नहीं रहेगी। विकास कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी। अन्य विभागों के सहयोग और उपलीज के माध्यम से निसर्गधाम का व्यापक विकास किया जा सकेगा।”
–डॉ. अरुण कुमार शेट्टी एन., आयुक्त, पिलिकुला विकास प्राधिकरण

पिलिकुला जमीन हस्तांतरण : प्रमुख तथ्य

– 339.90 एकड़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को हस्तांतरित
– 356.20 एकड़ लीज समाप्त करने का मंत्रिमंडलीय निर्णय
– 24.43 एकड़ आवंटन से बाहर
– 30 वर्ष लीज की अवधि
– 35,600 रुपए पुराना वार्षिक लीज शुल्क

 

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