जन आबादी क्षेत्र में रक्षा विभाग की जमीन, विकास कार्यों में बाधा

बेंगलूरु में वैकल्पिक भूमि की तलाश

हुब्बल्ली. कई दशकों से विकास कार्यों में बाधा बनी हुई हुब्बल्ली के विश्वेश्वरनगर में स्थित रक्षा विभाग की 7 एकड़ भूमि के लिए अब बेंगलूरु में वैकल्पिक भूमि की तलाश की जा रही है।

इस संबंध में जिलाधिकारी दिव्य प्रभु और विधायक महेश टेंगिनकाई जल्द ही बेंगलूरु में रक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा करेंगे।

योजना के अनुसार, इस रक्षा भूमि को राज्य सरकार की ओर से खरीदा जाएगा, और बदले में बेंगलूरु में स्थित सरकारी भूमि रक्षा विभाग को दी जाएगी। जमीन की पहचान की जा चुकी है और जन आबादी क्षेत्र में स्थित यह रक्षा भूमि शीघ्र ही सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

चेतावनी बोर्ड भी लगाए

पहले यह भूमि रक्षा बलों के घोड़ों को चराने के लिए उपयोग में लाई जाती थी, बाद में एनसीसी के फायरिंग कैंप के लिए दी गई थी। शहर के विस्तार के कारण आसपास रिहायशी क्षेत्र, घर और वाणिज्यिक भवन बन गए हैं, जिससे अब एनसीसी के लिए भी इस भूमि का उपयोग संभव नहीं रहा। अतिक्रमण की आशंका के चलते रक्षा विभाग ने सेना की भूमि, आम जनता को प्रवेश वर्जित है जैसे चेतावनी बोर्ड भी लगाए हैं।

बेंगलूरु में विकल्प तलाश रहा रक्षा विभाग

विधायक महेश टेंगिनकाई ने बताया कि इस क्षेत्र में रक्षा विभाग की भूमि होने से सडक़ चौड़ीकरण और पेयजल पाइपलाइन बिछाने में कठिनाई हो रही है। पिछले वर्ष इसके विकल्प के तौर पर शहर के बाहरी क्षेत्र में तीन स्थानों की पहचान की गई थी। मल्लसंद्र में एक पहाड़ी क्षेत्र को अंतिम रूप दिया गया था, परन्तु कीमत पर सहमति नहीं बनी। अब रक्षा विभाग बेंगलूरु में विकल्प तलाश रहा है।

कार्य प्रवृत्त हुआ जिला प्रशासन

जिलाधिकारी दिव्य प्रभु ने बताया कि पिछले सप्ताह रक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। अगली बैठक अगले सप्ताह होगी, जिसमें स्थानीय भूमि को राज्य सरकार की ओर से खरीद कर बेंगलूरु में भूमि के बदले देने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। चूंकि यह रक्षा विभाग की भूमि है, इसलिए यहां क्या-क्या विकास कार्य किए जा सकते हैं, इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव सौंपना पड़ेगा। इस दिशा में जिला प्रशासन कार्य प्रवृत्त हुआ है।

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By Bharat Ki Awaz

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