साध्वीवृंद का प्रवचन
दावणगेरे. शहर स्थित श्रीशंखेश्वर पाश्र्व राजेन्द्र गुरुमंदिर संघ काईपेट में विराजित साध्वीवृंद ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए आत्मकल्याण का संदेश दिया।
साध्वी भव्यगुणा ने कहा कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, जबकि आत्मा अजर-अमर और अविनाशी है। शरीर एक दिन मिट जाएगा, परन्तु आत्मा शाश्वत रहती है। ऐसे में व्यक्ति को शरीर के मोह में पडऩे के बजाय आत्मा के उत्थान और शुद्धि पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जीवन अनिश्चित है, इसलिए जब तक शरीर में शक्ति और सामथ्र्य है, तब तक अधिकाधिक धर्मसाधना कर लेनी चाहिए। तप, त्याग और साधना से आत्मा का कल्याण संभव है। जो व्यक्ति शरीर के आकर्षण और भौतिक सुखों में डूबा रहता है, उसकी आत्मा को कष्ट सहना पड़ता है। जिनवाणी आत्मकल्याण का सच्चा मार्ग दिखाती है।
साध्वी ने कहा कि वृद्धावस्था में शरीर कमजोर हो जाता है, तब चाहकर भी धर्मसाधना, शास्त्र श्रवण और प्रभु दर्शन संभव नहीं हो पाता। इसलिए जब तक नेत्रों में ज्योति और शरीर में सामथ्र्य है, तब तक समय का सदुपयोग कर धर्माराधना करनी चाहिए।
साध्वी शीतलगुणा ने कहा कि वर्तमान भौतिकवादी युग में संयम का मार्ग अपनाना अत्यंत दुर्लभ है। यदि किसी जीवात्मा के मन में वैराग्य और संयम का भाव उत्पन्न होता है, तो वह उसके पूर्व जन्मों के पुण्यों का परिणाम है। जो व्यक्ति स्वयं संयम का मार्ग नहीं अपना सकता, उसे भी वैराग्य धारण करने वाले मुमुक्षुओं की अनुमोदना अवश्य करनी चाहिए, क्योंकि यह भी पुण्यदायी है।
धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

