हुब्बल्ली संघ ने जिनमणिप्रभसूरीश्वर से 2027 चातुर्मास के लिए की विनती
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उपस्थिति में कार्यक्रम
पहले दिन करीब 15 हजार श्रद्धालु जुटे
हुब्बल्ली. राजस्थान के जैसलमेर में खरतरगच्छाधिपति आचार्य जिनमणिप्रभसूरीश्वर की पावन निश्रा में आयोजित भव्य चादर महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर कर्नाटक के हुब्बल्ली से दादावाड़ी संघ के सदस्य विशेष रूप से जैसलमेर पहुंचे और कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
महोत्सव स्थल पर भव्य मंडप सजावट, दादागुरुदेव जिनदत्तसूरी की आकर्षक झांकियां और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दादागुरुदेव की चादर से जुड़े इतिहास को दर्शाने के लिए एक विशेष संग्रहालय भी तैयार किया गया, जिसकी आकर्षकता श्रद्धालुओं की भीड़ से स्पष्ट दिखाई दी।
महोत्सव के प्रथम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन में जैन धर्म और हिंदू धर्म की समानताओं का उल्लेख करते हुए आध्यात्मिक मूल्यों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर साध्वी डॉ. विधुतप्रभाश्री द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन भी किया गया। आयोजन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पहले दिन लगभग 15 हजार श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन के दूसरे दिन जैसलमेर किले में स्थित दादागुरुदेव जिनदत्तसूरी की अलौकिक चादर को संग्रहालय से पहली बार बाहर निकालकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
इस दौरान दादावाड़ी अध्यक्ष रमेश बाफना ने आचार्य जिनमणिप्रभसूरीश्वर से वर्ष 2027 के चातुर्मास के लिए विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि कर्नाटक के प्रमुख शहर हुब्बल्ली को भी चातुर्मास का अवसर मिलना चाहिए। यह आचार्य की जन्मभूमि और उनके पैतृक परिवार की कर्मभूमि है। कार्यक्रम में जेठमल संकलेचा, पुखराज कवाड़, हीरालाल जैन, उत्तम ओस्तवाल, राकेश बाफना सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।

