पाठ्यक्रम में प्रतिस्पर्धी विषयों को शामिल करने की योजनाराज्य उच्च शिक्षा अकादमी के सभागार में नव-नियुक्त प्राचार्यों को प्रमाणपत्र वितरित करते उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर और कर्नाटक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.एम. खान।

उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर ने कहा

एसएससी परीक्षाओं में कर्नाटक के अभ्यर्थियों की भागीदारी बढ़ाने पर विचार

हुब्बल्ली. कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम.सी. सुधाकर ने कहा कि कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षाओं में कर्नाटक के अभ्यर्थियों का चयन अपेक्षाकृत कम होता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य के पाठ्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विषयों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

वे राज्य उच्च शिक्षा अकादमी के सभागार में नव-नियुक्त प्राचार्यों (प्रशासनिक प्रशिक्षण प्राप्त) को प्रमाणपत्र वितरण समारोह में संबोधित कर रहे थे।

मंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में छात्रों को सफलता के लिए तैयार करना आवश्यक है। इसके लिए अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त सभी प्राचार्यों से अपील की कि वे अपने-अपने कॉलेजों में छात्रों को अंग्रेजी सीखने के लिए प्रेरित करें और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करें।

डॉ. सुधाकर ने कहा कि प्राचार्य के तौर पर नियुक्त अधिकारियों को शैक्षणिक और प्रशासनिक दोनों क्षेत्रों में दक्षता दिखानी चाहिए। कॉलेज के सभी कर्मचारियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करना उनकी जिम्मेदारी है।

उच्च शिक्षा विभाग की आयुक्त मंजुश्री एन. ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और कौशल का उपयोग कर प्राचार्यों को छात्रों को बेहतर शिक्षा देनी चाहिए तथा कॉलेजों का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा विभाग की अतिरिक्त निदेशक ए.एच.एम. विजयलक्ष्मी ने की। इस अवसर पर कर्नाटक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.एम. खान, रमेश रटगेरी और अरुंधति उपस्थित थे।

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *