डॉ. सीतव्वा जोडट्टी ने कहा
‘महिला सांस्कृतिक उत्सव-2026’ का आयोजन
महिला शिक्षा और संगठन पर दिया जोर
विजयपुर. पद्मश्री सम्मानित समाजसेविका डॉ. सीतव्वा जोडट्टी ने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनने के लिए सबसे पहले घर की चार दीवारों से बाहर निकलना होगा। तभी समाज में वास्तविक परिवर्तन और महिलाओं का विकास संभव है।
वे कर्नाटक राज्य अक्कमहादेवी महिला विश्वविद्यालय के अहिल्याबाई स्नातकोत्तर महिला अध्ययन, अनुसंधान एवं विस्तार केंद्र तथा विभिन्न निकायों के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘महिला सांस्कृतिक उत्सव-2026’ का उद्घाटन कर कार्यक्रम को हुए संबोधित कर रही थीं।
डॉ. जोडट्टी ने कहा कि महिलाएं अबला नहीं, बल्कि सबला हैं। पालना झुलाने वाला हाथ ही देश पर राज करते हैं, जिसका उदाहरण देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा दिया गया ‘शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो’ का संदेश आज भी मूल मंत्र है।
उन्होंने कहा कि देवदासी प्रथा के उन्मूलन और देवदासी महिलाओं के विकास के लिए कार्यरत मास संस्था ने 29 वर्ष पूरे किए हैं। देवदासी महिलाओं को संपत्ति के अधिकार दिलाने और उनके लिए मासिक भत्ते की मांग को लेकर संस्था ने लगातार प्रयास किए। पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बागलकोट जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष वीणा काशप्पनवर ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रोजगार और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने महिलाओं को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने की सलाह दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव शंकरगौड़ा सोमनाळ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उद्देश्यों को साकार करने के लिए सभी को संकल्प लेना चाहिए। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार वितरित किए गए।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सिंडिकेट और अकादमिक परिषद के सदस्य, विभिन्न विभागों के डीन, छात्र-छात्राएं, शोधार्थी, शिक्षक एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने महिला जागरूकता और संघर्ष पर आधारित गीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को प्रेरणादायक बना दिया।

