सीएजी रिपोर्ट में मृत लाभार्थियों, संदिग्ध बैंक खातों और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
विपक्ष ने की एसआईटी जांच की मांग
हुब्बल्ली. कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी गृह लक्ष्मी योजना को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, योजना लागू होने के दो वर्षों के भीतर लगभग 225 करोड़ रुपए के संदिग्ध भुगतान सामने आए हैं। सीएजी ने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कई मामलों में स्पष्टीकरण मांगा है।
मृत लाभार्थियों के खातों में पहुंचती रही राशि
रिपोर्ट के अनुसार, ऑडिट अवधि तक योजना के 2.88 लाख लाभार्थियों की मृत्यु हो चुकी थी। इनमें से लगभग 1.03 लाख मामलों में परिवार के नए पात्र सदस्य का पंजीकरण कर दिया गया, लेकिन 1.08 लाख मृत लाभार्थियों के बैंक खातों में योजना की राशि भेजी जाती रही। इससे करीब 116 करोड़ रुपए का भुगतान हो गया।
सीएजी को 2.88 लाख मृत लाभार्थियों में से केवल 2.11 लाख का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया, जबकि 77,376 लाभार्थियों का विवरण विभाग उपलब्ध नहीं करा सका। रिपोर्ट में इस पर भी सवाल उठाया गया है कि इन खातों में भुगतान क्यों जारी रहा।
सीएजी ने उठाए कई अहम सवाल
सीएजी रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। प्रमुख प्रश्न इस प्रकार हैं—
19,020 लाभार्थियों के नाम के साथ सीमित संख्या में एक ही बैंक खातों का उपयोग क्यों किया गया?
केवल कुछ बैंक खातों में 3.03 लाख लेनदेन के माध्यम से लगभग 60.70 करोड़ रुपए क्यों जमा किए गए?
दो या उससे अधिक लाभार्थियों के लिए एक ही बैंक खाते का उपयोग कैसे संभव हुआ?
लाभार्थी और बैंक खाते का पूरा विवरण दर्ज किए बिना 46.52 करोड़ रुपए का भुगतान किस आधार पर किया गया?
संबंधित लाभार्थियों और बैंक खातों का पूरा विवरण अब तक क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया?
सीएजी ने विभाग को पूर्व में भी स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन विस्तृत जवाब नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए आवश्यक जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
विपक्ष का सरकार पर हमला
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि गृह लक्ष्मी योजना में 225 करोड़ रुपए की सरकारी लूट हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसके पीछे अधिकारियों और राजनेताओं का गठजोड़ हो सकता है तथा पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करना चाहिए।
अशोक ने कहा कि यदि मृत व्यक्तियों के नाम पर भी राशि जारी होती रही, तो संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी खातों के माध्यम से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया और इसे एक बड़े साइबर अपराध के रूप में जांचा जाना चाहिए।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

