साध्वी भव्यगुणाश्री ने बताया जैन ध्वज का आध्यात्मिक महत्व
22 जुलाई से ठाकुरद्वार जैन संघ में होगा चातुर्मास प्रवेश
मुंबई. ठाकुरद्वार स्थित श्रीआदेश्वर जिनालय में साध्वी भव्यगुणाश्री एवं शीतलगुणाश्री की निश्रा में वार्षिक ध्वजारोहण समारोह श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने समारोह में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त किया।
इस अवसर पर साध्वी भव्यगुणाश्री ने प्रवचन में कहा कि जैन ध्वज केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि जैन समाज की एकता, आस्था और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक है। जैन ध्वज पांच रंगों-लाल, पीला, सफेद, हरा और गहरे नीले-से बना होता है, जो 24 तीर्थंकरों के साथ जैन धर्म की पांच पूजनीय संस्थाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
उन्होंने कहा कि ध्वज के मध्य स्थित स्वस्तिक, उसके ऊपर बने तीन बिंदु, अर्धचंद्र तथा शीर्ष पर स्थित बिंदु का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। स्वस्तिक के ऊपर बने तीन बिंदु सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के प्रतीक हैं, जबकि अर्धचंद्र के ऊपर का बिंदु मोक्ष प्राप्त सिद्ध आत्मा का द्योतक है। उन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह जैसे जैन सिद्धांतों का पालन करने का संदेश भी दिया।
साध्वी शीतलगुणाश्री ने विधि-विधान के साथ मंदिर शिखर पर ध्वजारोहण सम्पन्न कराया। ध्वजारोहण का लाभ झमकाबाई-पूनमचंद मावाजी अंगारा (सांचोर) परिवार ने प्राप्त किया।
समारोह में ट्रस्ट के अध्यक्ष हंसमुखभाई, ललित कुमार सहित अन्य ट्रस्टी एवं बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।
इस अवसर पर जानकारी दी गई कि साध्वीवृंद का चातुर्मास प्रवेश 22 जुलाई को ठाकुरद्वार जैन संघ में होगा।
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