सरकारी संपत्तियों पर रसूखदारों का कब्जा
बेलगावी महानगर निगम की संपत्ति व्यवस्था पर उप लोकायुक्त की कड़ी फटकार
91 में से 78 संपत्तियों की लीज खत्म, फिर भी कब्जा बरकरार
40 व्यावसायिक इमारतों की दोबारा नीलामी नहीं
बेलगावी। सरकारी संपत्तियां जनता की धरोहर हैं, लेकिन बेलगावी महानगर निगम में इनके रखरखाव और आवंटन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कहीं सरकारी संपत्ति महज एक रुपए सालाना किराए पर दे दी गई, तो कहीं 99 साल की लीज पर सौंप दी गई। लीज की अवधि समाप्त होने के बावजूद पट्टाधारकों से संपत्तियां वापस नहीं ली गईं और न ही उनकी दोबारा नीलामी कराई गई। सरकारी संपत्तियों के इस तरह इस्तेमाल पर उप लोकायुक्त न्यायाधीश बी. वीरप्पा ने महानगर निगम अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकारी संपत्तियां कुछ लोगों को स्थायी अधिकार देने के लिए हैं। अधिकारियों से पूरे मामले के दस्तावेज और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जिले में तीन दिन तक विभिन्न सरकारी कार्यालयों और संस्थानों के निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में न्यायाधीश वीरप्पा ने महानगर निगम की कार्यप्रणाली में कई गंभीर खामियां उजागर कीं। संपत्तियों के आवंटन से लेकर कर निर्धारण, वाहनों के रखरखाव और पेयजल आपूर्ति तक व्यवस्था में लापरवाही सामने आई है।
78 संपत्तियों पर लीज खत्म, कब्जा बरकरार
महानगर निगम क्षेत्र की 91 सरकारी संपत्तियों में से 78 की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन संबंधित पट्टाधारकों का कब्जा अब भी बरकरार है। इसी तरह 553 व्यावसायिक इमारतों में से 40 की लीज पूरी हो गई है। इनकी दोबारा नीलामी नहीं कराई गई। उप लोकायुक्त ने इसे गंभीर मामला बताते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। पूर्व अधिकारियों की ओर से निजी व्यक्तियों को ए और बी खाता दस्तावेज जारी करने का मामला भी जांच के दायरे में है।
नौ नहीं, 140 से अधिक वाहनों के एफसी समाप्त
महानगर निगम अधिकारियों ने बताया था कि केवल नौ वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र (एफसी) की अवधि समाप्त हुई है। लेकिन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड की जांच में 140 से अधिक वाहनों के प्रमाणपत्र समाप्त होने की जानकारी मिली। अधिकारियों की ओर से दी गई जानकारी और सरकारी अभिलेखों में इस अंतर पर न्यायाधीश वीरप्पा ने नाराजगी जताई।
दस दिन में दो घंटे पानी
शहर के कुछ इलाकों के निवासियों ने दस दिन में केवल एक बार और महज दो घंटे पेयजल मिलने की शिकायत की। उप लोकायुक्त ने जलापूर्ति व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। महानगर निगम की 28,836 संपत्तियों का कर निर्धारण लंबित होने का मामला भी सामने आया है।
कर्मचारियों के खातों के लेन-देन की जांच
महानगर निगम के दो कर्मचारियों के खातों में जनवरी से अक्टूबर के बीच वेतन के अतिरिक्त क्रमश: 4,63,463 रुपए और 3.55 लाख रुपए के लेन-देन मिले हैं। उप लोकायुक्त ने इनका पूरा ब्योरा मांगा है। उपस्थिति, आवागमन और नकदी घोषणा रजिस्टरों का नियमानुसार रखरखाव नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए।
छात्रावासों से पंचायतों तक निरीक्षण
न्यायाधीश वीरप्पा ने रामतीर्थ नगर के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के बालक और बालिका मुरारजी देसाई आवासीय विद्यालयों में भोजन, स्वच्छता, राशन भंडारण और विद्यार्थियों की सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने स्वयं अल्पाहार चखकर गुणवत्ता परखी।
मुतगा और मुच्चंडी ग्राम पंचायतों के निरीक्षण में अभिलेखों, वित्तीय लेन-देन और नागरिकों के आवेदनों के निपटारे की जांच की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध लेआउट मिलने पर संचालकों के साथ संबंधित पंचायत विकास अधिकारियों (पीडीओ) पर भी कार्रवाई होगी। अवैध वित्तीय लेन-देन पाए जाने पर लोकायुक्त अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है।
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