मजदूरों की ई-केवाईसी अपडेट के लिए कदम

राज्य में पांच जिलों का चयन

कोप्पल. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कड़ा कदम उठाया है। अब योजना के अंतर्गत सभी मजदूरों का चेहरा पहचान (फेस ऑथेंटिकेशन) और ई-केवाईसी अपडेट अनिवार्य किया जा रहा है।

धांधलियों पर रोक लगने की उम्मीद

पहले चरण में कर्नाटक के कोप्पल, तुमकूरु, कोलार, हासन और हावेरी जिलों में इस प्रणाली को प्रयोगात्मक तौर पर लागू किया जाएगा। इसके बाद बिना काम किए मजदूरी लेना, मृत व्यक्तियों के नाम पर भुगतान और अन्य तरह की धांधलियों पर रोक लगने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था पोल खोलेगी

आधार से जुड़े ई-केवाईसी के जरिए केवल सक्रिय जॉब कार्ड ही मान्य रहेंगे। काम पर आए मजदूरों की फोटो रिकार्ड होगी और केवल उन्हीं को मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। नकली जॉब कार्ड बनाकर पैसे हड़पने वाले कर्मचारियों की भी यह नई व्यवस्था पोल खोलेगी।

30 सितंबर तक ई-केवाईसी पूरी करने का निर्देश

चेहरा पहचान और ई-केवाईसी अपडेट प्रक्रिया को लेकर जिला और तालुक स्तर पर पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कुछ स्थानों पर यह प्रक्रिया शुरू भी हो गई है।

ई-केवाईसी 30 सितंबर तक पूरा करने का निर्देश

कोप्पल जिले के 5,22,583, तुमकूरु के 3,81,962, हावेरी के 2,89,779. कोलार के 2,07,264 और हासन जिले के 2,96,816 जॉब कार्ड हैं। इन सबका ई-केवाईसी 30 सितंबर तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

प्रशिक्षण दिया जा रहा है

मनरेगा में पंजीकृत सक्रिय मजदूरों की जानकारी एनएमएमएस ई-केवाईसी ऐप पर अपडेट की जा रही है। इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। उन्हें पीपीटी और ट्यूटोरियल वीडियो के जरिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पांच जिलों का चयन

जिले की सभी ग्राम पंचायतों में सक्रिय मजदूरों के जॉब कार्ड की ई-केवाईसी के जरिए पुष्टि की जा रही है और राज्य में पहले चरण में पांच जिलों का चयन किया गया है।
वर्णित नेगी, सीईओ, जिला पंचायत, कोप्पल

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