ऑक्सफोर्ड में दावणगेरे का ‘तुला भवन’ का गौरवदावणगेरे का ‘तुलाभवन’ और बसवराज यळमल्ली।

बसवराज यळमल्ली देंगे 14 दिन का व्याख्यान

दावणगेरे। तौल और माप उपकरणों के अद्वितीय तथा ऐतिहासिक संग्रह के लिए प्रसिद्ध दावणगेरे के तुलाभवन के प्रमुख बसवराज यळमल्ली ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें इंग्लैंड के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से एक विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है, जिसके तहत वे विश्वविद्यालय के हिस्ट्री ऑफ साइंस म्यूजियम विभाग में अपने इस दुर्लभ संग्रह पर 14 दिवसीय विशेष व्याख्यान देंगे।

सदियों पुराना दुर्लभ संग्रह

दावणगेरे के चामराजपेट स्थित तुलाभवन में 17वीं से लेकर 20वीं शताब्दी तक व्यवहार में रहे विभिन्न प्रकार के तौल और माप उपकरण पूरी तरह सुरक्षित रखे गए हैं। इस विशाल संग्रहालय में भारत के साथ-साथ दुनिया के 18 देशों तथा प्राचीन देशी रियासतों में उपयोग किए जाने वाले ऐतिहासिक उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं।

5,360 से अधिक प्राचीन उपकरण

यळमल्ली परिवार पिछले छह दशकों (60 वर्षों) से तौल और माप के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। इसी दौरान उन्होंने इन ऐतिहासिक उपकरणों का संग्रहण करना आरंभ किया था। वर्तमान में तुलाभवन में 5,360 से भी अधिक उपकरण संग्रहीत हैं, जिनमें पुराने बाजारों में प्रयुक्त साधारण तराज़ू से लेकर तत्कालीन डाक विभाग द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले जटिल तौल यंत्र तक शामिल हैं।

विशिष्ट पहचान और रिकॉर्ड

इस अनूठे संग्रहालय में मांस व्यापार, स्वर्ण व्यवसाय तथा अन्य विशिष्ट कार्यों में प्रयुक्त होने वाले तरह-तरह के तराज़ू सुरक्षित रखे गए हैं। अपनी इसी विशेषता के कारण इस विशाल संग्रह को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी स्थान प्राप्त हो चुका है।

चित्रदुर्ग में निर्माणाधीन है नया संग्रहालय

संग्रह के बढ़ते आकार को देखते हुए चित्रदुर्ग जिले के सिरिगेरे में एक वृहद और आधुनिक संग्रहालय का निर्माण कार्य प्रगति पर है। नया भवन बनने के पश्चात इन सभी ऐतिहासिक उपकरणों को और अधिक व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक ढंग से आम जनता व शोधकर्ताओं के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिलेगी पहचान

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आगामी 12 से 26 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में बसवराज यळमल्ली अपने संग्रह की यात्रा, उसकी विशेषताओं और ऐतिहासिक महत्व पर विचार व्यक्त करेंगे। यह अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण तुलाभवन की विशिष्टता और भारतीय धरोहर को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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