2024 में पूरा होना था फ्लाईओवर
दिसंबर 2026 तक पूरा करने का दावा
349 करोड़ की परियोजना ने चार साल में बदला शहर का ‘दिल’
हुब्बल्ली। शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए शुरू किया गया फ्लाईओवर अब खुद यातायात संकट की बड़ी वजह बन गया है। जून 2024 में पूरा होने वाली 349.49 करोड़ रुपए की परियोजना अब भी अधूरी है। तीन-चार बार समयसीमा बदलने के बाद अब दिसंबर 2026 तक काम पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हर नई डेडलाइन के साथ शहर को राहत का इंतजार लंबा होता गया।
चन्नम्मा सर्किल, देसाई सर्किल, होसूर सर्किल, संगोली रायन्ना सर्किल और केनरा होटल क्षेत्र में निर्माण के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित है। कोविड, श्रमिकों की कमी, बारिश, पुलिस प्रकरण और तकनीकी कारणों को देरी की वजह बताया गया है।
600 मीटर सडक़ भी निर्माण की जद में
संगोली रायन्ना सर्किल से सर सिद्दप्पा कंबली मार्ग स्थित अशोका टावर तक करीब 600 मीटर सडक़ निर्माण क्षेत्र में है। रायन्ना सर्किल से टाइटन शोरूम तक करीब 250 मीटर हिस्से में सॉलिड रैंप बनाया जा रहा है। सडक़ के मध्य से दोनों ओर 18.5 मीटर हिस्से में सर्विस रोड समेत चार लेन का निर्माण चल रहा है।
इसी मार्ग पर महानगर निगम, मिनी विधानसौधा, बैंक, होटल और मंदिर होने से दिनभर भारी आवाजाही रहती है। सुबह 9 से 11 और शाम 4 से 8 बजे के बीच यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।
बीच में बस जितनी जगह, दोनों ओर जाम
निर्माण के कारण सडक़ के बीच कई जगहों पर केवल बस निकलने जितनी जगह बची है। दोनों ओर वाहनों की कतार लगती है। धूल के गुबार से दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री परेशान हैं। पानी का छिडक़ाव हो रहा है, लेकिन इससे स्थायी राहत नहीं मिल रही।
चन्नम्मा सर्किल पर शाम के एक घंटे में करीब 18 हजार वाहन गुजरते हैं। निर्माण के कारण वाहनों को आंतरिक मार्गों से मोड़ा जा रहा है, जिससे नीलिजिन रोड और कोप्पिकर रोड पर भी दबाव बढ़ गया है।
चार साल में 99 पेड़ों की बलि
फ्लाईओवर निर्माण के लिए 30-40 साल पुराने 99 पेड़ काटे गए। दूसरी ओर संगोली रायन्ना सर्किल से अशोका टावर तक भू-अधिग्रहण और मुआवजे का मामला पूरी तरह सुलझा नहीं है। पुलिस और महानगर निगम की सरकारी संपत्तियों के लिए करीब 62 करोड़ रुपए मुआवजे का मुद्दा लंबित बताया गया है।
फिल्मी पहचान से जाम के केंद्र तक
चन्नम्मा सर्किल कभी हुब्बल्ली की पहचान का अहम हिस्सा था। ‘आकस्मिक’ फिल्म में डॉ. राजकुमार पर फिल्माया गया लोकप्रिय गीत ‘हुट्टिदरे कन्नड़ नाडिनल्ली हुट्टबेकु’ इसी सर्किल में फिल्माया गया था। 1993 में फिल्म रिलीज होने के बाद सर्किल और अश्वारूढ़ रानी कित्तूर चन्नम्मा की प्रतिमा को नई पहचान मिली। बाद में यहां कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई। आज वही प्रतिमा निर्माण के बीच लगभग ओझल है।
अब काम पूरा होने का इंतजार
फ्लाईओवर के करीब 3.3 किमी हिस्से में निर्माण के कारण सडक़ें बदहाल हैं। सर सिद्दप्पा कंबली मार्ग का करीब 700 मीटर हिस्सा अपेक्षाकृत बेहतर बताया जा रहा है। चन्नम्मा प्रतिमा को फ्लाईओवर पूरा होने के बाद ऊंचे स्थान पर पुन: स्थापित करने की बात कही जा रही है, लेकिन अंतिम स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है।
इनका कहना है
काम अंतिम चरण में है। ठेकेदारों ने दिसंबर के अंत तक निर्माण पूरा करने का भरोसा दिया है।
–सतीश नागनूर, सहायक अभियंता, एनएच-पीडब्ल्यूडी
एक नजर में
परियोजना लागत : 349.49 करोड़ रुपए
फ्लाईओवर की लंबाई : 3.9 किमी
कार्यादेश : 4 जून 2021
निर्धारित अवधि : 4 जून 2024
नई समयसीमा : दिसंबर 2026
चन्नम्मा सर्किल पर एक घंटे में : करीब 18 हजार वाहन
काटे गए पेड़ : 99
विद्युत केबल स्थानांतरण : 2.71 करोड़ रुपए
पानी पाइपलाइन स्थानांतरण : 2.86 करोड़ रुपए
लंबित सरकारी संपत्ति मुआवजा : करीब 62 करोड़ रुपए
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