उडुपी के कटपाडी क्षेत्र में खेत, नारियल बागान और घरों पर मंडरा रहा संकट
कटपाडी (उडुपी). पिनाकिनी नदी का तेज बहाव और बढ़ता कटाव क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। कोटे ग्राम पंचायत क्षेत्र के कोटे और मट्टू गांव स्थित परेंकुद्रु तथा मट्टू कट्ट के आसपास रहने वाले लोग हर बारिश के मौसम में भय के साये में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी के बीचोंबीच बड़ी मात्रा में गाद जमा होने से जलधारा ने अपना रुख बदल लिया है। इसी कारण नदी किनारे की जमीन तेजी से कट रही है। कई स्थानों पर उपजाऊ कृषि भूमि और नारियल के सैकड़ों पेड़ नदी में समा चुके हैं। कुछ मकानों में दरारें भी पड़ गई हैं। बताया जा रहा है कि 10 से 15 मीटर तक भूमि कटाव हो चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले कटाव कुछ फीट तक सीमित रहता था, लेकिन अब गाद भरने के बाद मीटरों में भूमि बह रही है। ग्रामीणों ने नदी से गाद हटाकर तटबंध निर्माण की मांग की है, ताकि खेती, बागान और आवासीय क्षेत्र सुरक्षित रह सकें।
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। ज्वार के समय समुद्र का खारा पानी पिनाकिनी नदी में प्रवेश कर रहा है, जिससे आसपास के कुओं का पानी भी खारा हो गया है। ग्रामीणों को पंचायत की पाइपलाइन जल सुविधा भी पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द ड्रेजिंग और नदी तट संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की है, ताकि आगामी मानसून में बड़े नुकसान से बचा जा सके।
ग्राम पंचायत के पूर्व सदस्य रमेश पुजारी ने बताया कि जीआई टैग प्राप्त प्रसिद्ध “मट्टुगुल्ला” फसल सहित कई कृषि क्षेत्रों को खारे पानी से नुकसान पहुंच रहा है।
पूर्व सदस्य रत्नाकर कोट्यान ने कहा कि पहले 10 से 12 फीट गहरी रहने वाली पिनाकिनी नदी अब गाद भरने से मात्र दो फीट गहरी रह गई है, जिससे बाढ़ और कटाव की समस्या बढ़ी है।
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