लाखों के मवेशियों के लिए 5-6 हजार रुपए देने को भी तैयार नहीं खरीदार
नूलवी पशु मेले की तस्वीर
चारा बैंक और गोशालाएं शुरू करने की मांग
हुब्बल्ली। मानसून की बेरुखी ने किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है। खरीफ की फसल प्रभावित होने और रबी की बुवाई पर संकट के बीच अब पशुधन पर भी सूखे की मार पड़ रही है। चारे और पानी की कमी से किसान अपने बच्चों की तरह पाले मवेशियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। धारवाड़ जिले के कुंदगोल तालुक के नूलवी पशु मेले में संकट की यह तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
फसल चौपट, पशुओं के चारे का संकट
बारिश की कमी से खेतों में उपज की उम्मीद कमजोर पड़ गई है। फसल नहीं होने से पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी घट गई है। कुंदगोल, नवलगुंद और अण्णिगेरी सहित मैदानी क्षेत्रों के किसान पशुओं का पालन-पोषण नहीं कर पा रहे हैं। खेती के लिए बैल और दूध के लिए गाय-भैंस पालने वाले किसान मजबूरी में एक-दो पशु रखकर बाकी बेच रहे हैं। मेले में खरीदारों के मुकाबले पशु बेचने वालों की संख्या अधिक है।
लाखों के मवेशी, कीमत महज हजारों में
किसानों के मुताबिक, जिन गायों और बैलों की कीमत कभी लाखों रुपए तक होती थी, उनके लिए अब 5-6 हजार रुपए देने को भी खरीदार तैयार नहीं हैं। किसान हेमनगौड़ा के अनुसार, इंसान भूखा रहने पर किसी तरह भोजन जुटा सकता है, लेकिन पशुओं के लिए चारा खरीदना बड़ी चुनौती है। हर महीने हजारों रुपए चारे पर खर्च करना संभव नहीं होने से किसान कम कीमत मिलने पर भी मवेशियों को बेचने को मजबूर हैं।
चारा बैंक और गोशालाएं शुरू करने की मांग
किसानों का आरोप है कि सरकार ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों में चारा बैंक और गोशालाएं शुरू नहीं की हैं। उनका कहना है कि ऐसी व्यवस्था होने पर वे अपने पशुओं को वहां रखकर उनकी देखभाल कर सकेंगे और उन्हें बेचने की मजबूरी से बच पाएंगे।
सूखे की मार से किसान और पशुधन दोनों संकट में हैं। किसानों ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल चारा बैंक और गोशालाएं शुरू करने तथा पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था करने की मांग की है।
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