जलाऊ लकड़ी भंडारण सुविधाएं खाली, अंतिम संस्कार में मुश्किलें बढ़ीं
एकमात्र सरकारी केंद्र पर भी लकड़ी की कमी
गरीब परिवारों पर पड़ रहा भारी आर्थिक बोझ
भटकल (उत्तर कन्नड़). जलाऊ लकड़ी भंडारण (डिपो) में लकड़ी का भंडार समाप्त होने से स्थानीय लोगों को अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसरों पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरपनकट्टे, बंदरगाह रोड और तेंगिनगुंडी स्थित जलाऊ लकड़ी भंडारण पहले लकड़ी उपलब्ध कराते थे, लेकिन खरीदारों की संख्या कम होने का हवाला देकर राज्य वन निगम ने इन केंद्रों को बंद कर दिया।
वर्तमान में भटकल शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित एकमात्र केंद्रीय लकड़ी भंडारण ही लोगों का सहारा है। यहां से नागरिक अंतिम संस्कार या घरेलू उपयोग के लिए रियायत दर पर लकड़ी खरीदते हैं, लेकिन पिछले एक महीने से इसका स्टॉक भी लगभग खत्म हो चुका है।
रिक्शा चालक मालिक संघ के अध्यक्ष वेंकटेश नाइक ने कहा कि मौसम में ठंड बढऩे पर लकड़ी की मांग बढ़ जाती है। लेकिन अब तो अंतिम संस्कार के लिए भी लकड़ी नहीं मिल रही। कई बार शव लाने के बाद घंटों इंतजार करना पड़ा है। सरकारी डिपो में लकड़ी न होने पर लोगों को मजबूरन निजी डिपो से महंगी दरों पर लकड़ी खरीदनी पड़ती है, जो गरीब परिवारों के लिए बड़ा बोझ है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने पर भी विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए। ग्रामीणों ने सरकार से तत्काल लकड़ी आपूर्ति शुरू करने की मांग की है ताकि अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित न हों।
पेड़ कटाई कम होने से आपूर्ति प्रभावित
शिराली डिपो में कुछ मात्रा में लकड़ी उपलब्ध है, परन्तु पेड़ कटाई कम होने से जलाऊ लकड़ी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। कटाई कार्य तेज होने के बाद आपूर्ति सामान्य होगी।
–विश्वनाथ, आरएफओ, वन विभाग

