गोवा के निजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा छात्रों का रुझान
कारवार. कर्नाटक के सीमावर्ती उत्तर कन्नड़ जिले में सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घटती जा रही है। निजी स्कूलों के बढ़ते आकर्षण और सीमा क्षेत्र के विद्यार्थियों का गोवा के स्कूलों की ओर रुख करने से पिछले 17 वर्षों में जिले के 142 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।
गोवा सीमा से सटे कारवार तालुक में 31 सरकारी कन्नड़ माध्यम स्कूल और जोयडा तालुक में 14 स्कूल स्थायी रूप से बंद हो चुके हैं। ये स्कूल कभी दूरदराज गांवों के विद्यार्थियों की शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे।
कारवार शैक्षणिक जिले में सबसे अधिक असर
वर्ष 2009 से अब तक शून्य प्रवेश के कारण बंद हुए स्कूलों में अकेले कारवार शैक्षणिक जिले में 90 स्कूल शामिल हैं, जबकि सिरसी शैक्षणिक जिले में यह संख्या 52 तक पहुंच गई है। सिरसी तालुक में 19 और होन्नावर में 23 स्कूल विद्यार्थियों की कमी के कारण बंद हो गए।
शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पिछले डेढ़ दशक से सरकारी स्कूलों में नामांकन घट रहा है, लेकिन बीते पांच वर्षों में स्थिति और गंभीर हो गई है। बंद हुए लगभग 45 प्रतिशत स्कूल पिछले पांच वर्षों में शून्य प्रवेश वाले रहे हैं।
गोवा के निजी स्कूल खींच रहे छात्र
सामाजिक कार्यकर्ता किशन कांबले का कहना है कि कारवार तालुक के माजाली, सदाशिवगढ़, अस्नोटी और मुडगेरी जैसे गोवा सीमा से लगे गांवों के विद्यार्थी गोवा के लोलेम और अन्य क्षेत्रों के निजी स्कूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जोयडा क्षेत्र के डिग्गी और अन्य गांवों में भी यही स्थिति है। बड़ी संख्या में परिवार रोजगार के लिए गोवा पलायन कर रहे हैं और उनके साथ बच्चे भी गोवा के स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। इसका सीधा असर सीमावर्ती सरकारी और अनुदानित स्कूलों पर पड़ रहा है।
10 स्कूल बंद, केवल 3 फिर से खुले
2025-26 शैक्षणिक वर्ष में कारवार शैक्षणिक जिले के 10 सरकारी स्कूल शून्य प्रवेश के कारण बंद हुए। हालांकि पिछले नौ वर्षों में केवल तीन स्कूल दोबारा शुरू हो सके हैं।
इनमें होन्नावर तालुक का हिरेमठ कनिष्ठ प्राथमिक विद्यालय, कारवार का गोपशिट्टा उच्च प्राथमिक विद्यालय और अंकोला का माबगे कनिष्ठ प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं, जहां दोबारा विद्यार्थियों का प्रवेश शुरू हुआ।
तीन साल बाद होता है स्थायी बंद
कारवार शैक्षणिक जिले के शिक्षा अधिकारी भास्कर गावंकर ने बताया कि शून्य प्रवेश वाले स्कूलों को तुरंत स्थायी रूप से बंद नहीं किया जाता। तीन वर्षों तक नए प्रवेश की संभावना बनी रहती है। यदि इस दौरान विद्यार्थी नहीं आते, तब स्कूल स्थायी रूप से बंद कर ग्राम पंचायत को सौंप दिए जाते हैं।
सिरसी शैक्षणिक जिले के डीडीपीआई डी.आर. नायक ने कहा कि यदि तीन वर्षों के भीतर फिर से विद्यार्थियों का प्रवेश होता है तो स्कूल दोबारा शुरू किए जाते हैं।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

