रोजगार के अभाव में युवा कर रहे पलायन
28 साल बाद भी औद्योगिक विकास ठप
हावेरी. उत्तर कर्नाटक का प्रवेशद्वार कहे जाने वाला हावेरी जिला आज भी औद्योगिक विकास से वंचित है। राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल नेटवर्क, भरपूर बिजली आपूर्ति, नदियों का जलस्रोत और उच्च शिक्षा संस्थानों जैसी बुनियादी सुविधाओं से संपन्न होने के बावजूद यहां उद्योगों का अभाव है। परिणामस्वरूप जिले के शिक्षित युवा रोजगार की तलाश में बेंगलूरु, पुणे, हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
सुविधाएं मौजूद, उद्योग नहीं
जिले में 108 किमी लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग, 80 किमी रेल मार्ग, वर्धा-तुंगभद्रा नदियों का जल, हर गांव तक फैला हेस्कॉम बिजली नेटवर्क और इंजीनियरिंग, मेडिकल व विश्वविद्यालय स्तर के संस्थान मौजूद हैं। इसके बावजूद रोजगार सृजन करने वाले उद्योग नहीं लग पाए। फिलहाल गारमेंट्स, मिर्च प्रसंस्करण और ईंट भट्टों जैसे सीमित उद्योग ही कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश श्रमिक वर्ग को ही काम मिलता है।
कृषि संकट और पलायन
कृषि प्रधान जिले में मौसम की अनिश्चितता और फसलों को उचित मूल्य न मिलने से किसान खेती से विमुख हो रहे हैं। कृषि के साथ वैकल्पिक उद्योग न होने के कारण कृषक परिवारों के युवा भी शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे गांवों में बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह जाने की स्थिति बन रही है।
औद्योगिक क्षेत्र का सपना अधूरा
हावेरी जिले में गणजूर-कोलूर सीमा पर 400 एकड़ में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को शुरू हुए एक दशक बीत चुका है। 200 एकड़ भूमि अधिग्रहण और कुछ विकास कार्य होने के बावजूद परियोजना ठप है। स्थानीय उद्योग संगठनों का आरोप है कि राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण यह हाल है।
शिक्षित युवाओं की पीड़ा
देवगिरी स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने वाले महेश बताते हैं कि न तो कैंपस प्लेसमेंट हैं, न ही स्थानीय उद्योग। मजबूरी में उन्हें पुणे में नौकरी करनी पड़ी। उनका कहना है कि सभी सुविधाएं होते हुए भी उद्योग न आना प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है।
नव उद्यमियों के सामने बाधाएं
जो युवा स्वयं का उद्योग शुरू करना चाहते हैं, उन्हें एनए भूमि परिवर्तन, बिजली, पानी और अनुमति प्रक्रियाओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कार्यालयों के चक्कर लगाकर कई लोग हतोत्साहित हो जाते हैं। उद्योग संगठनों की मांग है कि एकल खिडक़ी प्रणाली लागू की जाए और औद्योगिक क्षेत्रों का शीघ्र विकास हो।
जनता की अपेक्षा
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और उद्योग संगठनों का मत है कि यदि औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर भूखंडों का पारदर्शी आवंटन किया जाए, तो उद्योग आएंगे, रोजगार बढ़ेगा और हावेरी से हो रहा पलायन रुकेगा। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस दिशा में कब ठोस कदम उठाते हैं।

