बेंगलूरु-विजयवाड़ा एक्सप्रेसवे ने रचा इतिहास, एक सप्ताह में 4 गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड

रिकॉर्ड गति से बन रहा आर्थिक कॉरिडोर

12 घंटे का सफर घटकर 6 घंटे होने की उम्मीद

भारतीय इंजीनियरों और श्रमिकों की मेहनत से वैश्विक स्तर पर चमका देश का नाम

हुब्बल्ली. भारत के बुनियादी ढांचा विकास में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। बेंगलूरु से विजयवाड़ा को जोडऩे वाला “बेंगलूरु-कडपा-विजयवाड़ा आर्थिक कॉरिडोर” निर्माण चरण में ही वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। इस एक्सप्रेसवे परियोजना ने मात्र एक सप्ताह में चार गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड बनाकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के मार्गदर्शन में राजपथ इन्फ्राकॉन कंपनी द्वारा किए जा रहे इस कार्य ने इंजीनियरिंग की नई मिसाल कायम की है। जनवरी 2026 के पहले और दूसरे सप्ताह में परियोजना के तहत चार अलग-अलग विश्व रिकॉर्ड बनाए गए।

रिकॉर्ड उपलब्धियां
आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी क्षेत्र में 24 घंटे के भीतर 28.89 लेन-किलोमीटर बिटुमिनस कंक्रीट बिछाकर पहला रिकॉर्ड बनाया गया। इसी अवधि में 10,655 मीट्रिक टन डामर बिछाकर दूसरा रिकॉर्ड दर्ज हुआ। 11 जनवरी को 57,500 मीट्रिक टन डामर बिछाने और 156 लेन-किलोमीटर सडक़ निर्माण के साथ तीसरा और चौथा रिकॉर्ड कायम किया गया। यह उपलब्धि अब तक के वैश्विक मानकों से कहीं आगे मानी जा रही है।

मेहनत के असली नायक
इन रिकॉड्र्स के पीछे हजारों श्रमिकों और इंजीनियरों की दिन-रात की मेहनत है। करीब 70 टिपर, 5 हॉट मिक्स प्लांट, 1 पेवर और 17 रोलर मशीनें लगातार कार्यरत रहीं। रात-दिन शिफ्ट में काम करते हुए टीम ने गुणवत्ता से समझौता किए बिना तेजी से निर्माण कर दुनिया को चौंका दिया।

बेंगलूरु-विजयवाड़ा एक्सप्रेसवे ने रचा इतिहास, एक सप्ताह में 4 गिनीज वल्र्ड रिकॉर्ड

परियोजना की विशेषताएं
करीब 624 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेसवे देवनहल्ली से शुरू होकर कडपा और अद्दंकी होते हुए विजयवाड़ा तक जाएगा। यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘भारत माला परियोजना चरण-2’ के तहत विकसित की जा रही है, जिसकी अनुमानित लागत 14,000 से 19,320 करोड़ रुपए है। इसमें 343 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड और बाकी ब्राउनफील्ड के रूप में विकसित हो रहा है।

आर्थिक बदलाव की दिशा
इस एक्सप्रेसवे के चालू होने पर बेंगलूरु से विजयवाड़ा की यात्रा समय 11-12 घंटे से घटकर मात्र 5-6 घंटे रह जाएगा। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के बीच व्यापार, कृषि और औद्योगिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

इस उपलब्धि की सराहना करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडु ने कहा कि यह नए भारत की पहचान है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकास विश्व के लिए उदाहरण बन रहा है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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