विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, भावी अधिवक्ताओं से कौशल और सामाजिक दायित्व निभाने का आह्वान
धारवाड़. जेएसएस सक्री विधि महाविद्यालय एवं धारवाड़ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विधिक जागरूकता एवं सहायता कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष नेरले वीरभद्रय्या विजय ने कहा कि कानून केवल एक प्रतिष्ठित पेशा नहीं, बल्कि समाज सेवा का सशक्त माध्यम है। भावी अधिवक्ताओं को अपने पेशे की गरिमा समझते हुए सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ कार्य करना चाहिए।
कौशल विकास पर दिया जोर
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वकालत के क्षेत्र में प्रवेश से पहले विशेष दक्षता और विषयगत विशेषज्ञता विकसित करें। एक सफल अधिवक्ता वही है, जो न्याय के साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी ईमानदारी से निर्वहन करे।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. रूपा इंगलहल्ली ने कहा कि आधुनिक युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन मानव की वास्तविक बुद्धिमत्ता और विवेक का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से एआई को केवल एक सहायक साधन के रूप में उपयोग करने की सलाह दी।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बाबुलाल दरगद को कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। वहीं, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में राज्य में तीसरा स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा नागरत्ना बी.एम. का भी अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विधि के विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सुनील पाटील ने किया तथा स्वागत डॉ. दीपा पाटील ने किया। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं सदस्य सचिव ए.एम. बडिगेर ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
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