किसानों की बढ़ी चिंता, मुआवजे की मांग तेज
धारवाड़ में सामान्य से 76 प्रतिशत कम वर्षा
फसल बचाने के लिए स्प्रिंकलर से सिंचाई
हुब्बल्ली. धारवाड़ जिले में मानसून की कमजोर बारिश ने कृषि गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। जिले की प्रमुख नकदी फसलों में शामिल प्याज की फसल नमी के अभाव में सूखने लगी है। फसल बचाने के लिए किसान स्प्रिंकलर के माध्यम से सिंचाई करने को मजबूर हैं, जबकि पर्याप्त वर्षा नहीं होने पर पूरी फसल नष्ट होने की आशंका जताई जा रही है।
जिले में इस वर्ष 7,630 हेक्टेयर में प्याज की बुवाई का लक्ष्य रखा गया था, जिसके मुकाबले 6,175 हेक्टेयर (80.93 प्रतिशत) क्षेत्र में बुवाई हुई है। पिछले एक सप्ताह में सामान्य 37 मिमी वर्षा के स्थान पर केवल 0.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे जिले में लगभग 76 प्रतिशत वर्षा की कमी रही। इसके कारण अंकुरित पौधे तेज धूप और नमी की कमी से मुरझाने लगे हैं।
फसल बचाने के लिए सिंचाई का सहारा
मानसून की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के बाद किसानों ने बुवाई कर दी थी, लेकिन उसके बाद बारिश थम गई। अब खेतों में अंकुरित पौधे सूखने की कगार पर हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सरकार से मुआवजे की मांग
कब्बेनूर गांव के किसान मल्लिकार्जुन कुरगुंद ने बताया कि प्रति एकड़ बुवाई, जुताई, खाद और निराई-गुड़ाई पर करीब 30 हजार रुपए खर्च किए हैं। इसके लिए कर्ज भी लेना पड़ा, लेकिन मौजूदा स्थिति में लागत निकलना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। उन्होंने सरकार से फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की, ताकि आगामी रबी सीजन के लिए बीज और खाद खरीदने में परेशानी न हो।
हेब्बल्ली गांव के किसान मुत्तु तलवायी ने बताया कि पहली बार बोए गए प्याज के बीज बारिश की कमी के कारण अंकुरित ही नहीं हुए। एक माह पहले दोबारा बुवाई की गई, लेकिन अब उगे हुए पौधे भी नमी के अभाव में सूख रहे हैं।
प्याज उत्पादक किसानों ने बागवानी विभाग से तत्काल सर्वेक्षण कर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजने और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है।
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