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‘पार्टिसिपेट मुंबई’ का लोकार्पण आज

450 से अधिक परियोजनाएं, 27 सीएसआर भागीदार और 500 से ज्यादा स्वयंसेवक जुड़े

सीएसआर की राशि सीधे बीएमसी को नहीं, वस्तु, तकनीक, उपकरण और विशेषज्ञ सेवाओं के रूप में होगा योगदान

समग्र के साथ समझौते से शिकायत से समाधान तक सेवा तंत्र में बदलाव

मुंबई। मुंबई के विकास में अब सरकार और महानगरपालिका के साथ उद्योग जगत, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जाएगा। बृहन्मुंबई महानगरपालिका मंगलवार को ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ परियोजना का लोकार्पण करेगी। इस अवसर पर बीएमसी और समग्र संस्था के बीच व्यापक समझौते पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हस्ताक्षर होंगे। कार्यक्रम बीएमसी मुख्यालय स्थित महानगरपालिका सभागार में सुबह 11 बजे होगा।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा अजित पवार, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर तथा मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा और आशीष शेलार भी मौजूद रहेंगे।

450 से अधिक परियोजनाएं मंच पर

‘पार्टिसिपेट मुंबई’ के तहत बीएमसी की नागरिक जरूरतों को उद्योगों, सीएसआर संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों, विशेषज्ञों और नागरिकों की क्षमता से जोड़ा जाएगा। इसके लिए डिजिटल ‘एकल मंच’ तैयार किया गया है। इस पर बीएमसी की 450 से अधिक परियोजनाएं और जरूरतें उपलब्ध होंगी।

इच्छुक संस्थाएं अपनी तकनीक, सामग्री, उपकरण, विशेषज्ञ सेवाएं, कौशल या स्वयंसेवी योगदान के जरिए परियोजनाओं से जुड़ सकेंगी। संस्थाएं अपनी ओर से नई परियोजना या तकनीकी समाधान भी प्रस्तावित कर सकेंगी।

सीएसआर की राशि नहीं, सीधे काम में योगदान

पहल की खासियत यह है कि सीएसआर राशि सीधे बीएमसी को हस्तांतरित नहीं की जाएगी। इसके बजाय वस्तु, तकनीक, उपकरण, विशेषज्ञ सेवाओं, कौशल और परियोजना क्रियान्वयन के रूप में योगदान लिया जाएगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यान, पर्यावरण, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन और नागरिक आधारभूत सुविधाओं से जुड़े प्रकल्प प्राथमिकता में रहेंगे।

बीएमसी के अनुसार अब तक 27 सीएसआर भागीदार, 23 स्वयंसेवी संस्थाएं, 56 क्रियान्वयन भागीदार और 500 से अधिक स्वयंसेवक पहल से जुड़ चुके हैं। एचयूएल, आरपीजी, सीएमएस और नारायण जैसी संस्थाओं ने भी नागरिक जरूरतों से जुड़े प्रस्ताव दिए हैं।

शिकायत से समाधान तक बदलेगा तंत्र

बीएमसी और समग्र के बीच समझौते का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू नागरिक सेवाओं को तेज, सरल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। शिकायतों के निस्तारण से लेकर आग, बाढ़ और चिकित्सा आपदा जैसी परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए एकीकृत शिकायत एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाएगी।

नागरिकों और कारोबारियों को सेवाएं लेने के लिए अनावश्यक दस्तावेज, कार्यालयों के चक्कर और प्रतीक्षा अवधि कम करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाया जाएगा।

वास्तविक समय के आंकड़ों से निगरानी

बीएमसी के प्रदर्शन की निगरानी के लिए वास्तविक समय के आंकड़ों पर आधारित डैशबोर्ड विकसित किए जाएंगे। प्रभाग स्तर से लेकर महानगरपालिका के शीर्ष नेतृत्व तक कार्यप्रदर्शन की समीक्षा होगी। सफल योगदान देने वाले संस्थानों और स्वयंसेवकों को प्रमाणपत्र तथा ‘वॉल ऑफ फेम’ के जरिए सम्मानित किया जाएगा।

बीएमसी के अनुसार प्रशासनिक जिम्मेदारी और अंतिम निर्णय का अधिकार महानगरपालिका के पास ही रहेगा। पहल को ‘मिशन मोड’ में लागू कर अल्प और मध्यम अवधि में मापने योग्य परिणाम हासिल करने पर जोर दिया जाएगा।

मुंबई की नागरिक जरूरतों और समाज-उद्योग की क्षमता को एक मंच पर लाने की यह पहल शहर के विकास में सरकारी तंत्र के साथ निजी और सामाजिक भागीदारी का नया मॉडल तैयार करने की दिशा में कदम है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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