कर्नाटक में बिजली वितरण के लिए टाटा पावर की एंट्री

12 जिलों में लाइसेंस आवेदन से सरकारी एस्कॉम कंपनियों को बढ़ी चिंता

हुब्बल्ली. कर्नाटक में करीब 10 वर्षों बाद किसी निजी कंपनी ने बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। टाटा पावर कंपनी लिमिटेड ने राज्य के 12 जिलों में बिजली आपूर्ति की अनुमति मांगते हुए कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग (केईआरसी) में आवेदन दाखिल किया है। इस कदम से पहले से घाटे में चल रही सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (एस्कॉम) की चिंता बढ़ गई है।

राज्य की पांच सरकारी बिजली वितरण कंपनियां वर्तमान में लगभग 40 हजार करोड़ रुपए के घाटे का बोझ उठा रही हैं। ऐसे में निजी कंपनी के प्रवेश से इनके ग्राहकों के कम होने और घाटा बढऩे की आशंका जताई जा रही है।

टाटा पावर ने बेंगलूरु ग्रामीण, चिक्कबल्लापुर, रामनगर, कोलार, तुमकूरु और चित्रदुर्ग सहित बेस्कॉम क्षेत्र में बिजली वितरण की अनुमति मांगी है। इसके अलावा मेस्कॉम क्षेत्र के उडुपी, दक्षिण कन्नड़ और शिवमोग्गा, हेस्कॉम क्षेत्र के बेलगावी, धारवाड़ और उत्तर कन्नड़ तथा सेस्क क्षेत्र के मैसूरु, चामराजनगर और हासन जिलों में भी कंपनी ने आवेदन किया है।

बेस्कॉम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, निजी कंपनियां प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराकर और कम शुल्क लगाकर शुरुआती दौर में ग्राहकों को आकर्षित कर सकती हैं। विशेष रूप से औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देकर सरकारी कंपनियों के राजस्व पर असर पड़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञ और केईआरसी के पूर्व सदस्य प्राभाकर का मानना है कि निजी क्षेत्र के आने से उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिल सकती है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि निजी कंपनियां पहले अधिक लाभ देने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देती हैं। उनका कहना है कि यदि कंपनियां मौजूदा बिजली नेटवर्क का ही उपयोग करेंगी, तो आम उपभोक्ताओं को बड़ा लाभ नहीं मिलेगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नया बिजली नेटवर्क खड़ा करने में भारी निवेश की जरूरत होगी, जिसका बोझ अंतत: उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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