पहली बार सातों न्यायालयों में केवल महिला न्यायाधीश करेंगी सुनवाई
भारतीय न्यायपालिका में बनेगा नया कीर्तिमान
हुब्बल्ली. कर्नाटक उच्च न्यायालय की धारवाड़ पीठ 1 अगस्त को भारतीय न्यायिक इतिहास के एक ऐतिहासिक अध्याय की साक्षी बनेगी। इस दिन पीठ के सभी सात न्यायालय कक्षों में केवल महिला न्यायाधीश ही मामलों की सुनवाई करेंगी। इसे भारतीय न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और अभूतपूर्व पहल माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश के आदेश से ऐतिहासिक पहल
उच्च न्यायालय अधिवक्ता संघ, धारवाड़ के अध्यक्ष बी.डी. हिरेमठ ने बताया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू ने इस संबंध में विशेष रोस्टर आदेश जारी किया है। इस निर्णय के लिए अधिवक्ता संघ ने मुख्य न्यायाधीश के प्रति आभार व्यक्त किया है।
पहली बार पूरी पीठ होगी महिला न्यायाधीशों के हवाले
अधिवक्ता संघ के अनुसार, भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में यह पहला अवसर होगा, जब किसी उच्च न्यायालय की पूरी पीठ में एक भी पुरुष न्यायाधीश नहीं होगा और पूरे दिन की न्यायिक कार्यवाही केवल महिला न्यायाधीशों द्वारा संचालित की जाएगी। इस ऐतिहासिक पहल के लिए धारवाड़ पीठ का चयन न्यायिक विकेंद्रीकरण तथा क्षेत्रीय पीठों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक माना जा रहा है।
10 महिला न्यायाधीशों के नेतृत्व में होंगे गठन
मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) रोण वासुदेव ने अधिसूचना जारी की है। इसके तहत 10 महिला न्यायाधीशों की अगुवाई में तीन खंडपीठ (डिवीजन बेंच) तथा चार एकलपीठ (सिंगल बेंच) गठित की गई हैं, जो 1 अगस्त को पूरे दिन न्यायिक कार्यवाही का संचालन करेंगी।
उत्तर कर्नाटक के अधिवक्ताओं ने भी इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल और अनुकरणीय बनाने के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। न्यायिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व को रेखांकित करने वाली इस पहल को देशभर में एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
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