फर्जी नेटवर्क से डेटा चोरी का खतरा
सार्वजनिक वाई-फाई पर बैंकिंग से बचने की सलाह
मेंगलूरु. रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, मॉल, होटल, कैफे और हवाई अड्डों पर उपलब्ध मुफ्त वाई-फाई सुविधा का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर अपराधी फर्जी वाई-फाई नेटवर्क तैयार कर लोगों की निजी और बैंकिंग संबंधी जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे हैं। इसे देखते हुए पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते समय विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठग असली नेटवर्क से मिलते-जुलते नाम, जैसे फ्री एयरपोर्ट वाई-फाई या मॉल वाई-फाई, का इस्तेमाल कर नकली नेटवर्क तैयार करते हैं। तेज इंटरनेट का लालच देकर वे मोबाइल नंबर, ई-मेल या नकली लॉगिन पेज के माध्यम से पासवर्ड हासिल करने की कोशिश करते हैं। एक बार उपयोगकर्ता ऐसे नेटवर्क से जुड़ जाए तो उसके मोबाइल या लैपटॉप का संवेदनशील डेटा चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
बैंकिंग लेनदेन से रहें दूर
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग कभी भी नेट बैंकिंग, यूपीआई भुगतान या अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए नहीं करना चाहिए। ऐसे नेटवर्क पर बैंक खाते की जानकारी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, ई-मेल और सोशल मीडिया लॉगिन जैसी गोपनीय सूचनाएं हैक होने का जोखिम रहता है।
सत्यता अवश्य जांचें
युवाओं के फर्जी वाई-फाई नेटवर्क का शिकार बनने की आशंका अधिक रहती है। इसलिए किसी भी मुफ्त वाई-फाई सेवा का उपयोग करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें। थोड़ी-सी सावधानी साइबर ठगी से बचा सकती है।
–सुधीर कुमार रेड्डी, पुलिस आयुक्त, मेंगलूरु.
इन सावधानियों का रखें ध्यान
मोबाइल में ऑटो वाई-फाई कनेक्ट विकल्प बंद रखें।
वाई-फाई का आधिकारिक नाम संबंधित संस्थान से पुष्टि करने के बाद ही कनेक्ट करें।
संदिग्ध पॉप-अप या लॉगिन लिंक पर क्लिक न करें।
संभव हो तो वीपीएन का उपयोग करें।
अज्ञात वेबसाइटों या लिंक पर अपनी निजी जानकारी दर्ज करने से बचें।
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