हट्टी पर ही निर्भर 30 से अधिक गांवों के लोगं
नौ वर्षों से फाइलों में अटकी मांग
प्रशासनिक उदासीनता से ग्रामीण परेशान
हट्टी (रायचूर). देश की प्रसिद्ध हट्टी स्वर्ण खदान क्षेत्र में स्थित हट्टी कस्बा आज 30 से अधिक गांवों के व्यापार, शिक्षा और प्रशासनिक आवागमन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इसके बावजूद हट्टी को अब तक होबली (राजस्व उप-मंडल) केंद्र का दर्जा नहीं मिल पाया है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर आवाज तेज हो गई है।
नौ वर्षों से फाइलों में अटकी मांग
2017 में राज्य सरकार के तत्कालीन मुख्य सचिव ने नए होबली गठन के मानदंडों के अनुसार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा था। लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।
मंत्रियों के पत्र भी रहे बेअसर
2016 में तत्कालीन जिला प्रभारी मंत्री तनवीर सेठ और राजस्व मंत्री तिम्मप्पा को कांग्रेस नेता मौलासाब ने पत्र लिखा था। तनवीर सेठ ने भी हट्टी को होबली केंद्र घोषित करने के लिए निर्देशात्मक पत्र भेजा था, लेकिन पहल कागजों से आगे नहीं बढ़ सकी।
12 किलोमीटर दूर जाना मजबूरी
किसानों, छात्रों और आम नागरिकों को पंजीयन, भूमि दस्तावेज, आय व जाति प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए गुरुगुंटा गांव (12 किमी दूर) जाना पड़ता है। इससे समय, धन और श्रम की भारी बर्बादी हो रही है।
प्रस्तावित नए होबली में शामिल गांव
रिपोर्ट में रोडलबंड, कड्डोणी, मेदिनापुर, कोठा, आन्वरी, चुकनट्टी, गेज्जलगट्टा, नीलोगल, वीरापुर, चिक्कनगनूर, हीरेनगनूर, यलगट्टा सहित कई गांवों को जनसंख्या और भौगोलिक मानकों के आधार पर शामिल करने का सुझाव दिया गया था।
जनता की मांग और आरोप
सामाजिक कार्यकर्ता शिवराज कंदगल ने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति की कमी से जनता परेशान है।
किसान संघ के अध्यक्ष शिवराजगौड़ा गुरिकार ने कहा कि फाइलें वर्षों से दबाई जा रही हैं, प्रशासनिक लापरवाही से ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कार्रवाई की जाएगी
जनता से कई आवेदन प्राप्त हुए हैं। पूर्व तहसीलदार की रिपोर्ट की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि मुख्यमंत्री स्वयं हस्तक्षेप करें तो यह न्यायसंगत मांग शीघ्र पूरी हो सकती है।
–सत्यम्मा लिंगसुगूर, तहसीलदार, हट्टी

