8 माह से वितरण ठप, टेंडर विवाद बना बाधा
मेंगलूरु। कर्नाटक के जेनुकुरुबा, मलेकुडिया और कोरग जैसे अति पिछड़े आदिवासी समुदायों को मिलने वाली महत्वपूर्ण पोषण किट योजना पिछले आठ महीनों से पूरी तरह ठप पड़ी है। समग्र आदिवासी विकास परियोजना (आइटीडीपी) के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली यह सहायता टेंडर प्रक्रिया में आई कानूनी अड़चनों के कारण राज्य के 9 जिलों में ठप हो गई है।
टेंडर विवाद से अटकी आपूर्ति
पोषण किट की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार की समय सीमा जनवरी में ही समाप्त हो चुकी है। इसके बाद नए टेंडर की प्रक्रिया प्रशासनिक और कानूनी उलझनों में फंस गई, जिससे वितरण का कार्य रुक गया। यद्यपि पूर्व टेंडर व्यवस्था से ही आपूर्ति जारी रखने की अनुमति दे दी गई थी, किंतु जिलास्तरीय विभागों तक आधिकारिक आदेश न पहुंचने से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
किट में मिलने वाली राहत सामग्री
योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी आदिवासी परिवार को प्रतिमाह सामग्री दी जाती थी, जिसमें शामिल हैं।
अनाज व दालें: 8 किलो चावल, 2 किलो तूर दाल तथा अन्य विविध दालें
तेल व डेयरी: 2 लीटर खाद्य तेल, आधा लीटर नंदिनी घी और 30 अंडे
मिठास व अन्य: गुड़ और चीनी
वर्ष 2008 में शुरू की गई इस कल्याणकारी योजना को बाद में पूरे 12 महीनों के लिए लागू किया गया था।
हजारों परिवार प्रभावित
इस योजना के बंद होने से केवल दक्षिण कन्नड़ जिले के 3,015 और उडुपी जिले के 3,120 पीडि़त आदिवासी परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। राशन और पोषण किट न मिलने से इन परिवारों को रोजमर्रा के भोजन के लिए भी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
समुदाय की पीड़ा और गुहार
दक्षिण कन्नड़ जिला कोरग संघ के अध्यक्ष सुंदर कोरग ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने पूरे 12 माह तक पोषण किट देने का स्पष्ट आदेश जारी किया था, लेकिन मार्च के बाद से वितरण पूरी तरह बंद है। समुदाय के लोग लगातार हमसे सवाल कर रहे हैं; सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर आपूर्ति बहाल करनी चाहिए।
इस संबंध में जिलाधिकारी दर्शन एच.वी. ने आश्वासन दिया है कि इस विषय पर संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा गया है और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा।
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