कुद्रेमुख मार्ग पर आधा काम भी नहीं पूरा
कलसा-कुद्रेमुख-एसके बॉर्डर सडक़ पर धीमी रफ्तार से काम
लोगों में नाराजगी बढ़ी
कलसा (चिक्कमगलूरु). कलसा-कुद्रेमुख-एस.के. बॉर्डर सडक़ के पुन: डामरीकरण के लिए 2025 में 13 करोड़ रुपए की बड़ी राशि मंजूर होने के बावजूद अब तक आधा काम भी पूरा नहीं हो पाया है। वर्षों से जर्जर इस सडक़ के सुधार की उम्मीद लगाए बैठे लोगों में अब गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है।
अधूरी रह गई करोड़ों की योजना
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा पहले 7 किमी सडक़ के लिए 7 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जबकि शेष 6 किमी के लिए विधायक नयना मोटम्मा के प्रयासों से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से 6 करोड़ रुपए मिले थे।
हालांकि, पीडब्ल्यूडी के हिस्से में भी केवल 4 किमी सडक़ का डामरीकरण धीमी गति से हुआ है, जबकि 3 किमी काम अब भी अधूरा है।
समयसीमा बीती, काम अधूरा
यह परियोजना 24 मार्च तक पूरी होनी थी, लेकिन अब तक कार्य पूरा नहीं हो सका। कुद्रेमुख घाटी क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण भविष्य में काम की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ठेकेदारों पर देरी का आरोप
लोक निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर चन्नय्या के अनुसार, डामर की कीमत बढऩे से ठेकेदार काम में देरी कर रहे हैं। उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।
एनएच प्राधिकरण का काम शुरू भी नहीं
दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) प्राधिकरण के हिस्से की 6 किमी सडक़ पर अब तक काम शुरू ही नहीं हुआ है। केवल किनारे मिट्टी खोदकर छोड़ दी गई है, जिससे लोगों में और नाराजगी है।
जनता में आक्रोश
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता तेजस नेल्लिबीडु का कहना है कि यह सडक़ कभी राज्य की मॉडल सडक़ थी, लेकिन अब सबसे खराब स्थिति में पहुंच गई है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि दोनों विभागों की लापरवाही के कारण यह महत्वपूर्ण मार्ग, जो मलेनाडु और तटीय क्षेत्रों को जोड़ता है, बदहाल हो गया है। मरीजों को इलाज के लिए मेंगलूरु और मणिपाल जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता विघ्नेश ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण बिटुमिन (डामर) की कमी है, जिससे काम प्रभावित हो रहा है।
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