पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग
विधान परिषद सभापति बसवराज होरट्टी ने कहा—बिना विशेषज्ञों की राय लिया गया फैसला छात्रों और शिक्षकों के हित में नहीं
हुब्बल्ली. कर्नाटक सरकार द्वारा एसएसएलसी परीक्षा में हिंदी सहित तृतीय भाषा विषयों के लिए अंकों की जगह ग्रेडिंग प्रणाली लागू करने के निर्णय पर विवाद गहराता जा रहा है।
विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि भाषा शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर डालेगा।
बिना चर्चा लिया गया निर्णय
शहर में पत्रकारों से बातचीत में होरट्टी ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने न तो विशेषज्ञों से परामर्श लिया और न ही शिक्षकों की राय को महत्व दिया। परीक्षा के ठीक पहले इस तरह का बदलाव करना छात्रों के मानसिक संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
तृतीय भाषाओं पर पड़ेगा असर
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल हिंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि कन्नड़, संस्कृत, उर्दू, मराठी और अन्य तृतीय भाषाओं पर भी इसका असर पड़ेगा। इससे भाषा विविधता को बढ़ावा देने वाली त्रिभाषा नीति कमजोर हो सकती है।
त्रिभाषा सूत्र का समर्थन
होरट्टी ने कहा कि 1961 से लागू त्रिभाषा सूत्र छात्रों के बौद्धिक विकास और बेहतर संवाद कौशल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई भाषाओं का ज्ञान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान करता है। ऐसे में द्विभाषा नीति को शिक्षा में लागू करना उचित नहीं है।
शिक्षकों का भविष्य भी दांव पर
उन्होंने चिंता जताई कि राज्य में लगभग 15,000 हिंदी शिक्षक कार्यरत हैं, जिनका भविष्य इस निर्णय से प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा, जो छात्र हिंदी में बेहतर अंक प्राप्त कर अपनी कुल प्रतिशत बढ़ाते हैं, उनके लिए भी यह प्रणाली नुकसानदेह साबित हो सकती है।
सरकार को लिखा पत्र
होरट्टी ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि पूर्व की अंक प्रणाली को जारी रखते हुए त्रिभाषा नीति को बरकरार रखा जाए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों से बचना चाहिए और सभी हितधारकों की राय लेकर ही कोई बदलाव करना चाहिए।
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