24 अप्रेल को विशेष कैबिनेट बैठक
नए फॉर्मूले पर सहमति बनने की उम्मीद
हुब्बल्ली. कर्नाटक में अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षण के उप-वर्गीकरण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब समाधान के करीब पहुंचता दिख रहा है। इस अहम मुद्दे पर फैसला लेने के लिए 24 अप्रेल को विशेष मंत्रिमंडल बैठक बुलाई गई है। यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं तो उसी दिन नए फॉर्मूले को मंजूरी मिल सकती है।
नया फॉर्मूला तैयार
सरकार ने दलित समुदाय के नेताओं और मंत्रियों के साथ कई दौर की चर्चा के बाद एक नया प्रस्ताव तैयार किया है। शालिनी रजनीश की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर एससी समुदाय को तीन श्रेणियों में बांटकर आरक्षण देने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के अनुसार, दाएं हाथ और दाएं हाथ समूहों को 5.3-5.3 प्रतिशत आरक्षण देने तथा अन्य समुदायों—जैसे कोरचा, लांबाणी और भोवी को 4.4 प्रतिशत हिस्सा देने पर विचार किया जा रहा है।
कैबिनेट में होगा विस्तृत मंथन
हालांकि, कुछ वरिष्ठ मंत्री इस फॉर्मूले में बदलाव का सुझाव भी दे रहे हैं। उनका मानना है कि घुमंतू समुदायों को 0.4 प्रतिशत अलग से देकर बाकी 4 प्रतिशत अन्य समूहों में बांटा जाए। सरकार कुल आरक्षण सीमा 15 प्रतिशत के भीतर रखते हुए संतुलित समाधान तलाश रही है।
पहले भी हो चुका है विवाद
इससे पहले नागमोहन दास की रिपोर्ट के आधार पर 6-6-5 फार्मूला लागू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन दलित समुदाय के भीतर ही सहमति नहीं बन पाई थी। खास तौर पर रोस्टर प्रणाली में असमानता के मुद्दे पर विरोध हुआ था।
सीएम की प्राथमिकता
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या इस विवाद को जल्द सुलझाने के पक्ष में हैं। यदि 24 अप्रेल को सहमति नहीं बनती है, तो लगातार और कैबिनेट बैठकों के जरिए समाधान निकालने की योजना है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से संवेदनशील इस मुद्दे पर सभी की नजरें अब आगामी कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है।
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