भूमि अधिग्रहण में भेदभाव का आरोप
सभी किसानों पर संशोधित दर लागू करने की मांग
कुष्टगी (कोप्पल). तालुक के तावरगेरा होबली (राजस्व केंद्र) क्षेत्र के गांवों में हाईटेंशन बिजली लाइन के लिए लगाए जा रहे टावरों के मुआवजे को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों ने जिला प्रशासन पर भूमि मूल्य निर्धारण में भेदभावपूर्ण नीति अपनाने का आरोप लगाया है।
विभिन्न गांवों के किसानों ने कहा कि उनकी कृषि भूमि पर बड़े-बड़े बिजली टावर लगाए गए हैं, लेकिन जमीन के उपयोग और मुआवजे को लेकर कंपनी तथा अधिकारियों ने सही जानकारी नहीं दी। किसानों का आरोप है कि सिंचित और असिंचित दोनों तरह की जमीन के लिए एक जैसी अवैज्ञानिक दर तय की गई है। कई स्थानों पर बोरवेल, बागान, फलदार पेड़, मकान और शेड होने के बावजूद उनका अलग से मूल्यांकन या मुआवजा नहीं दिया गया।
किसानों ने कहा कि गदग-कोप्पल पावरग्रिड ट्रांसमिशन कंपनी रायचूर थर्मल स्टेशन से गुलदल्ली ग्रिड तक नई बिजली लाइन बिछाने का काम कर रही है। इसके तहत कोप्पल जिले के कुष्टगी, यलबुर्गा और कुकनूर तालुकों में टावर लगाए जा रहे हैं। वर्ष 2024 में जिला प्रशासन ने टावर क्षेत्र के लिए प्रति वर्ग मीटर 2,600 रुपए तथा तार गुजरने वाले क्षेत्र के लिए 40 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर तय की थी।
हालांकि, एक किसान की आपत्ति के बाद जिला प्रशासन ने 31 दिसंबर 2025 को संशोधित आदेश जारी कर संबंधित किसान की भूमि दर बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दी। अब अन्य किसान भी यही दर लागू करने की मांग कर रहे हैं।
पूर्व विधायक अमरेगौड़ा बय्यापुर ने कहा कि सभी किसानों के लिए एक समान नियम लागू होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से संशोधित आदेश के अनुसार ही मुआवजा देने की मांग की।
किसानों ने आरोप लगाया कि बिजली लाइन गुजरने के बाद उनकी जमीन की बाजार कीमत घट गई है। टावरों के नीचे स्थित बोरवेल उपयोग योग्य नहीं रह गए और भविष्य में भूमि परिवर्तन की अनुमति मिलने में भी दिक्कत होगी।
जिलाधिकारी डॉ. सुरेश इटनाल ने कहा कि बढ़ी हुई दर वाला आदेश वापस ले लिया गया है और यदि किसान चाहें तो न्यायालय में इस मामले को चुनौती दे सकते हैं।
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