उद्योग जगत ने जताई चिंता
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ का दावा
सरकार से व्यापक परामर्श के बाद नया प्रस्ताव लाने की अपील
हुब्बल्ली. राज्य सरकार द्वारा जारी संशोधित न्यूनतम वेतन अधिसूचना की पुनर्समीक्षा करने की मांग उद्योगपतियों, विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा व्यापारियों ने की है। इस संबंध में कर्नाटक वाणिज्य एवं उद्योग संस्था द्वारा बुलाई गई विशेष बैठक में यह मांग प्रमुखता से उठाई गई।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित न्यूनतम वेतन वृद्धि का सबसे अधिक प्रभाव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर पड़ेगा। उनका कहना था कि नवोद्यमी, नए उद्योग स्थापित करने वाले उद्यमी तथा छोटे उद्योग पहले से ही उत्पादन लागत में वृद्धि, बिजली दरों में बढ़ोतरी, बैंक ब्याज दरों, कच्चे माल की महंगाई और बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे समय में न्यूनतम वेतन में अत्यधिक वृद्धि उद्योगों के संचालन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगी और कई इकाइयों के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर सकती है।
बैठक में राज्य सरकार से वर्तमान प्रारूप अधिसूचना वापस लेने तथा उद्योगपतियों और व्यापारिक संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद संशोधित प्रस्ताव जारी करने की मांग की गई। इस संबंध में सरकार को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया जाएगा।
बैठक में संस्था के अध्यक्ष जी.के. आदप्पगौडर, उपाध्यक्ष सिद्धेश्वर कम्मार, वीरण्णा कल्लूर, पूर्व अध्यक्ष विनय जवली, अश्विन कोतंब्री, विजय भारती, व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजकिरण मेणसिनकाई, अशोक गडाद सहित अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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