‘सिद्धारूढ़-1’ सिलिकॉन चिप का किया डिजाइन‘सिद्धारूढ़-1’ सिलिकॉन चिप के डिजाइन मॉडल के साथ आईआईआईटी धारवाड़ के युवा इंजीनियर।

आईआईआईटी धारवाड़ की बड़ी उपलब्धि

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को मिली नई ताकत

विद्यार्थियों ने स्वदेशी चिप विकसित कर बढ़ाया प्रदेश का गौरव

हुब्बल्ली. भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) धारवाड़ के विद्यार्थियों की टीम ने अत्याधुनिक सिलिकॉन चिप विकसित कर देश के तकनीकी क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महान संत एवं समाज सुधारक सिद्धारूढ़ स्वामी के सम्मान में इस चिप का नाम ‘सिद्धारूढ़-1’ रखा गया है।

तीसरे और चौथे वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा विकसित यह चिप केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की उभरती सेमीकंडक्टर क्षमता का वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन भी है।

माइक्रोकंट्रोलर की क्षमता बढ़ाने में सहायक

‘सिद्धारूढ़-1’ एक जीपीआईओ (जनरल पर्पज इनपुट/आउटपुट) एक्सपैंडर चिप है, जो माइक्रोकंट्रोलर और सिंगल-बोर्ड कंप्यूटरों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करती है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में सेंसर, एक्ट्यूएटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एक साथ जोडऩा संभव होगा। इसका उपयोग औद्योगिक स्वचालन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रोबोटिक्स तथा स्मार्ट उपकरणों में किया जा सकेगा।

वैश्विक संस्थानों के सहयोग से हुआ विकास

आईआईआईटी धारवाड़ देश की उन छह संस्थाओं में शामिल है, जिन्हें विश्व की 55 चयनित संस्थाओं के साथ इस परियोजना में कार्य करने का अवसर मिला। चिप डिजाइन में विश्व प्रसिद्ध कंपनी सिनॉप्सिस तथा फेब्रिकेशन क्षेत्र की अग्रणी संस्था ग्लोबलफाउंड्रीज का सहयोग प्राप्त हुआ। विकसित चिप को जर्मनी स्थित ग्लोबलफाउंड्रीज इकाई में टेप-आउट के लिए भेजा गया है, जिसे चिप निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

विद्यार्थियों की मेहनत रंग लाई

अंतिम वर्ष के इलेक्ट्रॉनिक्स छात्र शिवशंकर बी. के नेतृत्व में टीम ने कई महीनों तक चिप के डिजाइन, गुणवत्ता परीक्षण तथा तकनीकी सुधार पर काम किया। उद्योग विशेषज्ञ आनंद बरिया और संतोष देवनलिक्कर ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा बल

आईआईआईटी धारवाड़ के निदेशक एस.आर. महादेव प्रसन्न ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं कुशल मानव संसाधन तैयार करने के साथ-साथ भारत के सेमीकंडक्टर मिशन, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्यों को मजबूती प्रदान करेंगी तथा चिप निर्माण के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने में सहायक सिद्ध होंगी।

कर्नाटक के विद्यार्थियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर की चिप डिजाइन किए जाने को राज्य के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

 

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