रक्षास्थल में सुविधाओं का अभाव
प्रशासनिक लापरवाही पर उठे सवाल
रायचूर. परिवार से बिछड़े, मानसिक एवं शारीरिक रूप से असहाय तथा जीवन की राह खो चुके लोगों को सहारा देने के लिए स्थापित रायचूर का निराश्रित पुनर्वास केंद्र स्वयं अव्यवस्था और उपेक्षा का शिकार हो गया है। केंद्र में रह रहे लोगों को सम्मानजनक जीवन देने के बजाय उनसे विभिन्न कार्य कराए जाने के आरोप सामने आए हैं।
केंद्र में करीब 250 पुरुष और महिला निराश्रित रह रहे हैं। सरकारी अभिलेखों के अनुसार यहां 25 कर्मचारियों और अतिरिक्त वार्डनों की नियुक्ति की गई है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों और आश्रितों का आरोप है कि कई अधिकारी और वार्डन नियमित रूप से केंद्र का दौरा नहीं करते, जिससे निगरानी और व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं।
निराश्रितों पर काम का बोझ
आरोप है कि शारीरिक रूप से सक्षम और मानसिक रूप से स्थिर कुछ निराश्रितों से केंद्र के भीतर भोजन पकाने, बर्तन साफ करने, भवन और शौचालयों की सफाई, अन्य आश्रितों की दाढ़ी बनाने तथा रात में चौकीदारी जैसे कार्य कराए जा रहे हैं।
छात्रावासों की सफाई में भी उपयोग का आरोप
समाज कल्याण विभाग के डॉ. बी.आर. आंबेडकर छात्रावास तथा अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के पोस्ट मैट्रिक व्यावसायिक बालक छात्रावास में भी कुछ निराश्रितों से सफाई कार्य कराए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
केंद्र में कर्मचारियों की कमी और आधारभूत सुविधाओं की समस्याएं भी बनी हुई हैं। नागरिकों ने मांग की है कि संबंधित विभाग तत्काल स्थिति का जायजा लेकर निराश्रितों को सुरक्षित, सम्मानजनक और मानवीय वातावरण उपलब्ध कराए।
जांच और कार्रवाई की मांग
समाजसेवी शिवप्पा नायक ने कहा कि निराश्रित केंद्र सुरक्षा और सुकून का स्थान होना चाहिए। आश्रितों से विभिन्न छात्रावासों में काम करवाना निंदनीय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक प्रवीणकुमार ने बताया कि निराश्रितों को अन्य छात्रावासों में सफाई कार्यों में लगाने संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

