करोड़ों किसानों को होगा लाभ
होसपेटे (विजयनगर). कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के करोड़ों किसानों की जीवनरेखा माने जाने वाले तुंगभद्रा जलाशय में स्थापित 33 नए क्रेस्ट गेटों का गुरुवार को भव्य समारोह में लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ एक साथ चार गेट खोलकर किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर जलाशय परिसर उत्सव स्थल में तब्दील नजर आया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने लोकार्पण से पूर्व अपने आराध्य संत गंगाधर अज्जय्या स्वामी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर विशेष पूजा की। मुख्य मंच पर भी स्वामी का चित्र स्थापित किया गया था। जलाशय के प्रवेश द्वार को पारंपरिक तोरणों और पुष्प सज्जा से आकर्षक रूप दिया गया था।
तीन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
केंद्र जलशक्ति मंत्री तथा कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम दक्षिण भारत की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक तुंगभद्रा जलाशय के इतिहास में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह जलाशय कर्नाटक के विजयनगर, बल्लारी, कोप्पल और रायचूर जिलों सहित पड़ोसी राज्यों के लाखों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराता है।
सुरक्षा के लिए हाईटेक तकनीक
नए क्रेस्ट गेटों की स्थापना के साथ जलाशय प्रबंधन ने पहली बार अत्याधुनिक डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू की है। गेटों पर त्रिअक्षीय (थ्री-एक्सिस) झुकाव सेंसर और वायरलेस मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जो गेटों में होने वाले सूक्ष्मतम बदलावों और दबाव को भी तुरंत दर्ज करेंगे।
यह तकनीक गेटों की संरचनात्मक स्थिरता पर चौबीसों घंटे नजर रखेगी। किसी भी प्रकार की असामान्य गतिविधि या दबाव बढऩे पर नियंत्रण कक्ष को स्वत: चेतावनी प्राप्त होगी, जिससे संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सकेगा।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
कार्यक्रम के मद्देनजर जलाशय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई। बम निरोधक दस्ते, श्वान दस्ते और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में प्रत्येक वाहन और व्यक्ति की सघन जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। वीवीआईपी आगमन को देखते हुए विशेष बैटरी चालित वाहनों की व्यवस्था भी की गई।
तुंगभद्रा परियोजना एक नजर में
वर्ष 1953 में शुरू हुई तुंगभद्रा परियोजना की कुल जल भंडारण क्षमता 133 टीएमसी है। वर्ष 2024 में 19वें क्रेस्ट गेट के क्षतिग्रस्त होने के बाद सभी 33 गेटों को बदलने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। लगभग 52 करोड़ रुपए की लागत से नए गेट तैयार कर अप्रेल 2026 में स्थापना कार्य पूरा किया गया। प्रत्येक नए क्रेस्ट गेट का वजन लगभग 49.5 टन है।
नई तकनीक और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली के साथ तुंगभद्रा जलाशय अब आने वाले वर्षों में तीन राज्यों की सिंचाई व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित तथा मजबूत आधार प्रदान करेगा।
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