कबाड़ में छिपा विरासत का खजानामेंगलूरु के मालेमार स्थित कबाड़ की दुकान में बना संग्रहालय।

दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं के साथ बनाया लघु पुस्तकालय

बच्चों में पढऩे की आदत विकसित करने की अनूठी पहल

मेंगलूरु. मेंगलूरु के मालेमार स्थित एक कबाड़ की दुकान इन दिनों अपनी अनूठी पहचान के कारण आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां कबाड़ के बीच इतिहास, संस्कृति और ज्ञान का ऐसा खजाना संजोया गया है, जिसे देखने वाले इसे किसी संग्रहालय और पुस्तकालय से कम नहीं मानते। इस अनोखी पहल के पीछे कबाड़ व्यवसायी इब्राहिम खलील की वर्षों की मेहनत और संग्रहण का जुनून है।

दुर्लभ वस्तुओं का अनमोल संग्रह

दुकान में पुराने टेलीफोन, हारमोनियम, रेडियो, ग्रामोफोन, टेप रिकॉर्डर, कैमरे, पारंपरिक बर्तन, कृषि उपकरण, लालटेन, पुराने मोबाइल फोन, घडिय़ां, बोरवेल हैंडपंप, औषधि तैयार करने के उपकरण, जहाज की दिशा बताने वाला कंपास सहित अनेक दुर्लभ वस्तुएं सुरक्षित रखी गई हैं। इसके अलावा प्राचीन सिक्कों, पुराने नोटों और 100 से अधिक देशों के डाक टिकटों का भी आकर्षक संग्रह मौजूद है।

पुस्तकालय और बच्चों के लिए विशेष पहल

खलील ने अपनी दुकान में एक लघु पुस्तकालय भी बनाया है, जिसमें पुराने ग्रंथ, पत्र-पत्रिकाएं, शब्दकोश, साहित्य और कहानी की किताबें उपलब्ध हैं। इच्छुक पाठक पुस्तकें घर ले जा सकते हैं, लेकिन उन्हें वापस लौटाना अनिवार्य है। बच्चों के लिए अलग पुटाणी पुस्तकालय (बाल पुस्तकालय) बनाया गया है, जहां कहानी की किताबें, नोटबुक और पेंसिल नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पहल का लाभ बड़ी संख्या में बच्चे उठा रहे हैं।

स्कूलों में भी लगाते हैं प्रदर्शनी

इब्राहिम खलील अब तक 10 से अधिक विद्यालयों में डाक टिकट, प्राचीन वस्तुओं, सिक्कों और पुराने मुद्रा नोटों की प्रदर्शनियां लगा चुके हैं। उनका उद्देश्य बच्चों में इतिहास और विरासत के प्रति रुचि जगाना है। हाल ही में बेंगलूरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने अपने संग्रह का प्रदर्शन किया।

खलील बताते हैं कि पुराने सामानों के प्रति उनका लगाव उस समय शुरू हुआ, जब वे एक ऐसी दुकान में काम करते थे, जहां दुर्लभ वस्तुएं आती थीं, लेकिन बाद में बेच दी जाती थीं। इसी प्रेरणा से उन्होंने करीब दस वर्ष पहले अपना संग्रह शुरू किया। उनका कहना है कि इन वस्तुओं का मूल्य धन से नहीं आंका जा सकता और वे इन्हें बेचने के बजाय आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित रखना चाहते हैं। उचित स्थान मिलने पर वे इन्हें व्यवस्थित संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना भी रखते हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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