निजी संस्थानों की भरमार, गरीब विद्यार्थियों के लिए सरकारी शिक्षा अब भी दूर
मूडबिद्री (दक्षिण कन्नड़). जैन काशी और शिक्षा नगरी के रूप में प्रसिद्ध मूडबिद्री नगर में निजी शिक्षण संस्थानों का तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन गरीब और मध्यमवर्गीय विद्यार्थियों के लिए सरकारी हाईस्कूल और प्री-यूनिवर्सिटी (पीयू) कॉलेज का अभाव गंभीर समस्या बना हुआ है। नगर परिषद क्षेत्र में वर्तमान में 10 निजी हाईस्कूल और छह निजी पीयू कॉलेज संचालित हैं, जबकि सरकारी स्तर पर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
नगर परिषद क्षेत्र के गांधीनगर, मास्तिकट्टे, ज्योतिनगर, कोडंगल्लू, सुभाष नगर, पुत्तिगे बीदि सहित कई इलाकों में सरकारी प्राथमिक विद्यालय हैं, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी सातवीं तक पढ़ाई करते हैं। इसके बाद सरकारी हाईस्कूल न होने के कारण उन्हें दूरस्थ क्षेत्रों या निजी संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
8 किलोमीटर दूर जाना मजबूरी
सरकार की महत्वाकांक्षी कर्नाटक पब्लिक स्कूल (केपीएस) भी नगर से लगभग आठ किलोमीटर दूर मिजार में स्थित है। वहीं सरकारी पीयू और डिग्री कॉलेज एडपदवु में हैं। सीमित बस सेवाओं के कारण विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को प्रतिदिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
मार्पाडी स्कूल परिसर बन सकता है समाधान
बस स्टैंड के समीप स्थित मार्पाडी सरकारी स्कूल विद्यार्थियों की कमी के कारण बंद हो चुका है। एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस परिसर में पर्याप्त कक्षाएं, सभागार, शौचालय और खेल मैदान उपलब्ध हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसी परिसर में सरकारी हाईस्कूल और पीयू कॉलेज शुरू किया जाए तो शहर के विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलेगी।
वर्षों से मांग, अब तक नहीं मिला समाधान
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से सरकारी हाईस्कूल और पीयू कॉलेज की मांग उठाते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस संबंध में विधायक उमानाथ कोट्यान ने कहा कि नगर परिषद क्षेत्र में भूमि की कमी है, हालांकि मार्पाडी स्कूल परिसर उपयुक्त विकल्प हो सकता है। उन्होंने इस प्रस्ताव को सरकार के समक्ष उठाने का आश्वासन दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षा नगरी के रूप में पहचान रखने वाले मूडबिद्री में सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा की व्यवस्था शीघ्र शुरू करनी चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो सके।
Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?
अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें
हर खबर सबसे पहले
Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

