एमआरपीएल की इथेनॉल परियोजना पर संशयएमआरपीएल

हरिहर परियोजना पर पुनर्विचार, अब बायो-एटीएफ संयंत्र पर जोर

मेंगलूरु. राज्य की एकमात्र रिफाइनरी मेंगलूरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) की हरिहर में प्रस्तावित इथेनॉल उत्पादन परियोजना करीब नौ वर्ष बाद अनिश्चितता के दौर में पहुंच गई है। कंपनी अब इस परियोजना को नए स्वरूप में विकसित करने पर विचार कर रही है, जबकि रिफाइनरी परिसर में ही बायो-एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

एमआरपीएल ने वर्ष 2017 में दावणगेरे जिले के हरिहर के हनगवाड़ी में लगभग 1,341 करोड़ रुपए की लागत से द्वितीय पीढ़ी के लिग्नो-सेल्यूलोसिक बायोमास इथेनॉल संयंत्र की योजना बनाई थी। 47.65 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम मंजूरी अब तक नहीं मिली है। साथ ही रिफाइनरी से लगभग 270 किलोमीटर दूर संयंत्र स्थापित करने की व्यावहारिकता पर भी कंपनी प्रबंधन ने सवाल उठाए हैं।

बायो-एटीएफ पर बढ़ा जोर

एमआरपीएल अब रिफाइनरी परिसर में करीब 350 करोड़ रुपए की लागत से प्रतिदिन 20 किलोलीटर बायो-एटीएफ उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इसमें पाम ऑयल के अवशेष, उपयोग किया हुआ खाद्य तेल तथा वृक्षों से प्राप्त जैविक तेलों का उपयोग किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में विमानों के ईंधन में बायो-एटीएफ मिश्रण अनिवार्य होने की संभावना को देखते हुए कंपनी इसे अधिक लाभकारी परियोजना मान रही है। ऐसे में हरिहर की इथेनॉल परियोजना के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल और गहरे हो गए हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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