सुधा मूर्ति को मानद डॉक्टरेट
313 विद्यार्थियों को मिलेगी उपाधि
दो स्वर्ण और 10 रजत पदक प्रदान
हुब्बल्ली. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) धारवाड़ का सातवां दीक्षांत समारोह 18 जुलाई को दोपहर 3 बजे आयोजित किया जाएगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. वेंकप्पय्या आर. देसाई ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए कहा कि आइआइटी धारवाड़ के स्थापना दशक के उपलक्ष्य में राज्यसभा सदस्य, पद्म भूषण सम्मानित समाजसेवी एवं लेखिका सुधा मूर्ति को मानद डॉक्टरेट (ऑनरेरी डॉक्टरेट) से सम्मानित किया जाएगा।
313 विद्यार्थियों को मिलेगी उपाधि
दीक्षांत समारोह में बीटेक के 207, बीएस के 13, एमटेक के 56, एमएस के 12, पीएचडी के 24 तथा एक स्नातकोत्तर डिप्लोमा सहित कुल 313 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा दो स्वर्ण पदक, 10 रजत पदक तथा उत्कृष्ट छात्र को ओम प्रकाश गोयल एवं सेवती देवी गोयल पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
समारोह के मुख्य अतिथि आइआइटी दिल्ली के विद्युत अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर भीम सिंह होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में टाटा पावर रिन्यूएबल माइक्रोग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज गुप्ता तथा पैन आइआइटी एलुमनी इंडिया के अध्यक्ष प्रभात कुमार शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आइआइटी धारवाड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. शरद कुमार सराफ करेंगे।
शोध और नवाचार में उल्लेखनीय प्रगति
प्रो. देसाई ने कहा कि संस्थान ने ग्रामीण आजीविका एवं विकास केंद्र की स्थापना के लिए 15 करोड़ रुपए की परियोजना का प्रस्ताव भेजा है। प्रधानमंत्री विकास योजना के तहत 13.75 करोड़ रुपए तथा कर्नाटक सरकार के विद्यालयों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए 15 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। महिला सशक्तिकरण, सतत प्रौद्योगिकी, पवन ऊर्जा और दुर्लभ धातुओं के अनुसंधान से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा कि धरती (धारवाड़ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर) फाउंडेशन के माध्यम से 20 से अधिक स्टार्टअप को सहयोग दिया जा रहा है। संस्थान ने आइआइएससी, इसरो और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के साथ भी कई समझौते किए हैं।
हरित परिसर और राष्ट्रीय लक्ष्य
आइआइटी धारवाड़ के 470 एकड़ परिसर में वर्षा जल संचयन, 1.8 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और पर्यावरण अनुकूल अधोसंरचना विकसित की गई है। संस्थान ने वर्ष 2030 तक जल, ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन में नेट-जीरो लक्ष्य हासिल करने का संकल्प लिया है।
प्रो. देसाई ने कहा कि एनआइआरएफ-2025 की रैंकिंग में आइआइटी धारवाड़ देश के इंजीनियरिंग संस्थानों में 77वें स्थान पर रहा है और आने वाले वर्षों में शीर्ष 50 संस्थानों में स्थान बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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