आल्वास इंजीनियरिंग कॉलेज ने रचा इतिहास
आइबीएम इंडिया के सहयोग से स्थापित अत्याधुनिक प्रयोगशाला में छात्रों को मिलेगा एंटरप्राइज एआई तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण
मूडबिदरी (दक्षिण कन्नड़)। दक्षिण कन्नड़ जिले के मूडबिदरी स्थित आल्वास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एआइइटी) में आइबीएम सॉफ्टवेयर लैब्स के सहयोग से स्थापित देश की पहली आइबीएम एआइ लैब का बुधवार को उद्घाटन किया गया। आइबीएम इंडिया के वॉटसनएक्स एआइ प्रभाग के कार्यक्रम निदेशक एवं प्रमुख रतीश मुरलीधरन ने प्रयोगशाला का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर रतीश मुरलीधरन ने कहा कि उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा विद्यार्थियों को अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआइ) तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस लैब की स्थापना की गई है। आइबीएम वॉटसनएक्स एआई, वॉटसनएक्स ऑर्केस्ट्रेट और एआइ आधारित डेवलपर टूल्स से सुसज्जित यह प्रयोगशाला छात्रों और शिक्षकों को एंटरप्राइज एआइ प्लेटफॉर्म तथा वास्तविक औद्योगिक अनुप्रयोगों पर काम करने का अवसर प्रदान करेगी।
उन्होंने कहा कि एआइ ने उन्नत तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन भविष्य में सफलता केवल तकनीक से नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता, बदलावों के अनुरूप खुद को ढालने और समाजोपयोगी समाधान विकसित करने की सोच से तय होगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आल्वास शिक्षा प्रतिष्ठान के प्रबंध न्यासी विवेक आल्वा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानव क्षमता बढ़ाने वाले साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। जिस तरह वैश्वीकरण और इंटरनेट क्रांति ने रोजगार की प्रकृति बदली, उसी तरह एआइ भी नए रोजगार और अवसरों का सृजन करेगा। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों को समय के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों में बदलाव करना होगा।
कार्यक्रम में एआइइटी के पूर्व छात्र एवं वर्तमान में आइबीएम इंडिया के एआइ विशेषज्ञ मनोज बी. शेट्टी ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. पीटर फर्नांडिस, कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. मंजुनाथ कोठारी, आइबीएम के प्रतिनिधि, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
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