आठ बैराज डूबे; रक्कसकोप्पा जलाशय लबालब
कृष्णा, दूधगंगा और वेदगंगा नदियों में जलस्तर बढ़ा
बेलगावी को वर्षभर पेयजल राहत की उम्मीद
आलमट्टी और बसवसागर जलाशय भी क्षमता के करीब
बेलगावी। महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में लगातार दो दिनों से हो रही भारी वर्षा और विभिन्न जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण कर्नाटक में नदियों का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। बुधवार को राज्य की ओर कुल 76,288 क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ, जिससे सीमा क्षेत्र के सभी आठ बैराज जलमग्न हो गए और आवागमन पूरी तरह ठप पड़ गया। इस मानसून में बैराजों के डूबने की यह तीसरी घटना है, जिसके चलते लोगों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।
सीमावर्ती बैराजों पर आवागमन ठप
राधानगर, वारणा, धूव तथा कनहेर जलाशयों से पानी छोड़े जाने के बाद दूधगंगा नदी में 14,080 क्यूसेक तथा कृष्णा नदी में 62,208 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। इसके परिणामस्वरूप वेदगंगा, दूधगंगा और कृष्णा नदी पर स्थित जत्राट-भिवसी, अक्कोल-सिदनाल, बारवाड-कुन्नूर, भोज-शिवापुरवाड़ी, कारदगा-भोज, मलिकवाड़-दत्तवाड़, कल्लोल-यडूर तथा मांजरी-सवदत्ती सहित सभी आठ बैराज जलमग्न हो गए हैं।
रक्कसकोप्पा जलाशय भरने से बेलगावी को राहत
लगातार हुई वर्षा से बेलगावी तालुक का रक्कसकोप्पा जलाशय पूरी तरह भर गया है। अधिकारियों के अनुसार, लगभग आधा टीएमसी क्षमता वाले इस जलाशय में पर्याप्त जल संग्रह होने से बेलगावी शहर को अगले एक वर्ष तक पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस वर्ष वर्षा में देरी के कारण जलाशय देर से भरा, जबकि पिछले वर्ष जून के तीसरे सप्ताह में ही यह लबालब हो गया था।
प्रमुख जलाशयों में तेजी से बढ़ा जल भंडार
महाराष्ट्र का कोयना जलाशय 78.28 प्रतिशत, वारणा 84.91 प्रतिशत, राधानगर 86.53 प्रतिशत, पाटगांव 65.85 प्रतिशत तथा कालम्मवाड़ी 58.97 प्रतिशत भर चुका है।
उधर, विजयपुर जिले के लाल बहादुर शास्त्री (आलमट्टी) जलाशय में 95 प्रतिशत जल संग्रह हो चुका है। यहां वर्तमान में 117.4 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि जलाशय की कुल क्षमता 123.08 टीएमसी है। इसी प्रकार, यादगीर जिले के बसवसागर (नारायणपुर) जलाशय में 90 प्रतिशत जल संग्रह है और वहां से 1,09,903 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
वहीं, तुंगभद्रा जलाशय में 34 प्रतिशत जल भंडारण के साथ 36 टीएमसी पानी संग्रहित है, जबकि घटप्रभा जलाशय में 64 प्रतिशत क्षमता के साथ 32.78 टीएमसी पानी उपलब्ध है। जल संसाधन विभाग ने निचले क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
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