एक एकड़ में 40-45 कड़ाह के बजाय अब महज 25 कड़ाह गुड़ तैयार
भाव 5,000 रुपए से बढक़र 6,500 रुपए प्रति क्विंटल, फिर भी उत्पादकों को राहत नहीं
बेलगावी। सूखे और गन्ने की घटती पैदावार ने अब पारंपरिक गुड़ उद्योग की कमर तोड़ दी है। बेलगावी जिले के मोदगा गांव में गुड़ बनाने की इकाइयों (आलेमने) में नए सीजन का काम शुरू हो गया है, लेकिन गन्ने की कमी के कारण उत्पादन में भारी गिरावट आई है। शुद्ध गन्ने के रस से गुड़ तैयार करने वाली इन इकाइयों के सामने कच्चे माल की कमी और घटते उत्पादन की चुनौती खड़ी हो गई है।
जिले में करीब 3.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। सांबरा, माविनकट्टी, बालकुंद्री, मोदगा और सुलेभावी में 20 से अधिक पारंपरिक गुड़ इकाइयां दशकों से संचालित हैं। दशहरा के बाद मोदगा में तीन इकाइयों ने काम शुरू किया है।
एक एकड़ में उत्पादन 45 से घटकर 25 कड़ाह
इकाई संचालक शिवाजी अष्टेकर के अनुसार, पहले एक एकड़ गन्ने से 40-45 कड़ाह गुड़ तैयार होता था, लेकिन इस बार उत्पादन घटकर करीब 25 कड़ाह रह गया है। एक बार में 1.25 टन गन्ने की पेराई से निकले रस को पकाकर लगभग 1.60 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। उनकी इकाई में बिना चीनी मिलाए केवल गन्ने के रस से गुड़ बनाया जाता है।
84 दिन के बजाय 50 दिन भी मुश्किल
संचालक अप्पय्या अष्टेकर ने बताया कि उनकी इकाई में प्रतिदिन छह कड़ाह गुड़ बनता है। पिछले साल 84 दिनों में 504 कड़ाह उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार गन्ने की कमी के चलते 300 कड़ाह उत्पादन भी मुश्किल लग रहा है।
भाव बढ़ा, उत्पादन घटा
पिछले साल गुड़ 5,000 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा था, जो इस बार बढक़र करीब 6,500 रुपए हो गया है। हालांकि, उत्पादन में गिरावट के कारण बढ़े भाव का लाभ भी उत्पादकों को अपेक्षित राहत नहीं दे पा रहा है।
प्रमुख आंकड़े
विवरण — स्थिति
जिले में गन्ने का रकबा — 3.35 लाख हेक्टेयर
पारंपरिक गुड़ इकाइयां — 20 से अधिक
पहले प्रति एकड़ उत्पादन — 40-45 कड़ाह
वर्तमान उत्पादन — करीब 25 कड़ाह
पिछले साल भाव — 5,000 रुपए प्रति क्विंटल
वर्तमान भाव — 6,500 रुपए प्रति क्विंटल
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