तीन कमरों में 100 बालिकाएं, एक ही स्नानघर, मात्र तीन शौचालय
14 वर्षों से जारी नारकीय स्थिति
हुनगुंद (बागलकोट). तालुक के नागूर गांव में स्थित कर्नाटक कस्तूरबा गांधी छात्राओं का आवासीय विद्यालय की हालत बेहद दयनीय है। तीन छोटे कमरों में करीब 100 छात्राएं रहने को मजबूर हैं। पूरे परिसर में छात्राओं के लिए केवल एक स्नानघर और तीन शौचालय उपलब्ध हैं। यह स्थिति पिछले 14 वर्षों से बनी हुई है।
वर्ष 2011 में एमपीएस स्कूल में शुरू हुआ यह विद्यालय 2017 से खाली पड़ी सरकारी कन्या विद्यालय की इमारत में संचालित हो रहा है। लेकिन अब तक संस्थान की अपनी कोई इमारत नहीं है। तंग कमरों में 30-35 बालिकाएं फर्श पर बिछाई गई चादरों पर सोती हैं। जगह इतनी कम है कि चादरें बिछाना भी संभव नहीं होता। ट्रंक, कपड़े और सामान रखकर रहने की मजबूरी उनकी दैनिक यातना बन गई है।
शौचालयों की कमी से कई छात्राओं को खुले में शौच जाना पड़ता है। नहाने के लिए एक ही स्नानघर उपलब्ध है, जिसके कारण सुबह से ही लंबी कतार लग जाती है। कई बार छात्राओं को शौचालय के सामने की खुली जगह में स्नान करना पड़ता है।
तुरंत सुविधाएं उपलब्ध करें
छात्राओं का कहना है कि शौचालय, स्नानघर और रहने की जगह की कमी है। उनकी व्यथा सुनने वाला कोई नहीं। न भवन निर्माण हुआ और न ही आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था। वे बेसब्री से उस दिन की प्रतीक्षा कर रही हैं, जब उन्हें सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में पढऩे और रहने की सुविधा मिलेगी। संबंधित अधिकारी तुरंत सुविधाएं उपलब्ध कराना चाहिए।
नए भवन का प्रस्ताव भेजा
छात्रावास के लिए जगह की कमी है। गांव वालों ने 33 गुंटे जमीन दी है और नए भवन का प्रस्ताव भेजा गया है।
–ए.एम. बडिगेर, मुख्य शिक्षिका, कर्नाटक कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, नागूर

