कर्नाटक में बढ़ रहे सिजेरियन प्रसव

चित्रदुर्ग में सबसे अधिक 81 प्रतिशत सी-सेक्शन

निजी अस्पतालों में हर 100 प्रसव में 64 ऑपरेशन से, डब्ल्यूएचओ मानकों से कई गुना अधिक आंकड़े

तटीय जिलों में अपेक्षाकृत कम मामले

मेंगलूरु. कर्नाटक में सिजेरियन प्रसव (सी-सेक्शन) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2025-26 के आरसीएच आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल सिजेरियन प्रसव का प्रतिशत बढक़र 64 हो गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 62 प्रतिशत था। यानी निजी अस्पतालों में होने वाले प्रत्येक 100 प्रसवों में 64 ऑपरेशन के जरिए कराए जा रहे हैं।

चित्रदुर्ग में सबसे अधिक सी-सेक्शन

राज्य में सबसे अधिक 81 प्रतिशत सिजेरियन प्रसव चित्रदुर्ग जिले में दर्ज किए गए हैं। इसके बाद तुमकूरु और विजयनगर (80 प्रतिशत), चिक्कमगलूरु और चामराजनगर (76 प्रतिशत), गदग (74 प्रतिशत), मंड्या और हासन (73 प्रतिशत) का स्थान है।

डब्ल्यूएचओ मानकों से काफी अधिक

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार कुल प्रसवों में 10 से 15 प्रतिशत तक सिजेरियन की दर स्वीकार्य मानी जाती है और केवल मां या शिशु के जीवन पर खतरा होने की स्थिति में ही इसकी आवश्यकता होती है। लेकिन कर्नाटक के कई जिलों में यह दर 70 प्रतिशत से अधिक पहुंचने से स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।

तटीय जिलों में अपेक्षाकृत कम मामले

उडुपी जिले में सिजेरियन प्रसव की दर 58 प्रतिशत, उत्तर कन्नड़ में 47 प्रतिशत और दक्षिण कन्नड़ में 39 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि यह डब्ल्यूएचओ के मानकों से काफी अधिक है, लेकिन राज्य के औसत से कम होने के कारण इसे अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तटीय क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों के अधिक उपयोग, बेहतर स्वास्थ्य जागरूकता और सामान्य प्रसव को प्राथमिकता दिए जाने से यह अंतर दिखाई दे रहा है।

सहज प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सरकारी अस्पतालों में सामान्य प्रसव को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मचारी गर्भवती महिलाओं में जागरूकता फैला रहे हैं तथा केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही सिजेरियन करने पर बल दिया जा रहा है।

व्यवसायीकरण से जुड़ा विषय बनी

सी-सेक्शन जीवन बचाने वाली चिकित्सा पद्धति है, लेकिन इसे सामान्य विकल्प नहीं बनना चाहिए। इसका उपयोग केवल चिकित्सकीय आवश्यकता होने पर ही किया जाना चाहिए। बढ़ती सिजेरियन दर अब सार्वजनिक स्वास्थ्य, चिकित्सा नैतिकता और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यवसायीकरण से जुड़ा विषय बन गई है।
शालिनी मेंगलूरु, सामाजिक कार्यकर्ता

जान बचाने के लिए सिजेरियन जरूरी

आपात स्थिति में मां और शिशु की जान बचाने के लिए सिजेरियन जरूरी हो सकता है, लेकिन अनावश्यक ऑपरेशन बढऩे से महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, अधिक खर्च और लंबे समय तक स्वास्थ्य लाभ की स्थिति पैदा होती है।
डॉ. जांसी डिसूजा, स्त्री रोग विशेषज्ञ

इन जिलों में सबसे अधिक सी-सेक्शन

चित्रदुर्ग – 81 प्रतिशत
तुमकूरु – 80 प्रतिशत
विजयनगर – 80 प्रतिशत
चिक्कमगलूरु – 76 प्रतिशत
चामराजनगर – 76 प्रतिशत
गदग – 74 प्रतिशत
मंड्या – 73 प्रतिशत
हासन – 73 प्रतिशत

 

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By Bharat Ki Awaz

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